IIT मद्रास का AI प्लेटफॉर्म: नई मिश्रधातुओं की खोज होगी तेज और सस्ती
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है जो पर्यावरण के अनुकूल नई और बेहतर मिश्रधातुओं (Alloys) की खोज में…
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) मद्रास के शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित एक ऐसा प्लेटफॉर्म बनाया है जो पर्यावरण के अनुकूल नई और बेहतर मिश्रधातुओं (Alloys) की खोज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्लेटफॉर्म हजारों वैज्ञानिक शोधपत्रों से डेटा निकालकर सबसे उन्नत मिश्रधातुओं का एक विशाल डेटाबेस तैयार करता है, जिसे दुनिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा सार्वजनिक डेटाबेस माना जा रहा है।
यह उपलब्धि इलेक्ट्रिक वाहन, विमानन, नवीकरणीय ऊर्जा और समुद्री ढाँचों जैसे क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस प्रणाली के विकास का नेतृत्व डॉ. रोहित बत्रा ने किया, और इस शोध को प्रतिष्ठित पत्रिका 'एडवांस्ड साइंस' में प्रकाशित किया गया है।
सबसे बड़ा मिश्रधातु डेटाबेस
IIT मद्रास की टीम ने 10,000 से ज़्यादा शोधपत्रों का विश्लेषण करके 1,85,000 से अधिक रिकॉर्ड वाला यह डेटाबेस तैयार किया है। यह AI सिस्टम स्वचालित रूप से मिश्रधातु की संरचना, उसे बनाने की प्रक्रिया, परीक्षण की स्थितियों और 350 से ज़्यादा भौतिक गुणों की जानकारी निकाल सकता है। इससे वैज्ञानिकों को पहले हो चुके प्रयोगों का डेटा आसानी से मिल जाएगा, जिससे शोध में लगने वाला समय और खर्च दोनों कम होंगे।
किन क्षेत्रों में होगा फायदा?
इस प्लेटफॉर्म ने तीन प्रमुख क्षेत्रों के लिए संभावित मिश्रधातुओं की पहचान की है, जो पारंपरिक सामग्रियों से बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं:
- हल्की सामग्री: यह वाहनों और विमानों का वजन घटा सकती है, जिससे ईंधन की खपत कम होगी।
- चुंबकीय सामग्री: इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रिक मोटर और ट्रांसफार्मर को बेहतर बनाने में हो सकता है।
- क्षरण-रोधी (Corrosion-resistant) मिश्रधातु: यह समुद्री ढाँचे, ऊर्जा और रासायनिक उद्योगों के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकती है।
इस प्लेटफॉर्म की एक और खास बात यह है कि यह सिर्फ मज़बूती पर ध्यान नहीं देता, बल्कि पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक पहलुओं को भी विश्लेषण में शामिल करता है। इससे कम पर्यावरणीय प्रभाव वाली और महत्वपूर्ण कच्चे माल पर निर्भरता घटाने वाली मिश्रधातुओं को खोजना संभव होगा।
भविष्य की योजनाएँ
IIT मद्रास की टीम अब इस AI को और उन्नत बनाने पर काम कर रही है ताकि यह वैज्ञानिक चित्रों और सूक्ष्म संरचना वाली तस्वीरों से भी जानकारी निकाल सके। भविष्य में इस तकनीक का विस्तार पॉलीमर, सिरेमिक और अन्य मिश्रित सामग्रियों के लिए भी किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान (NRF), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और IIT मद्रास के वाधवानी स्कूल ऑफ डेटा साइंस एंड AI से सहयोग मिला है।
इनपुट: IANS



