पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी पर ममता का बड़ा आरोप, 'मुझे घर से न निकलने देने की धमकी दी'
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस वक्त हलचल मच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर एक गंभीर आरोप लगाया। ममता बनर्जी के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी ने एक…
पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस वक्त हलचल मच गई जब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी पर एक गंभीर आरोप लगाया। ममता बनर्जी के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से धमकी दी कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ममता अपने घर से बाहर भी न निकल पाएं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ममता ने इस घटना को 'भारतीय राजनीति में एक नया निचला स्तर' करार दिया है।
अपने बयान में तृणमूल कांग्रेस की चेयरपर्सन ने कहा कि एक संवैधानिक पद पर बैठे मुख्यमंत्री द्वारा उन्हें इस तरह की धमकी देना विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश है। उन्होंने सवाल उठाया, "शब्द बिल्कुल साफ थे: 'मैं पक्का करूंगा कि आप घर से बाहर न निकल पाएं।' आखिर इसका क्या मतलब है? नजरबंदी? डराना-धमकाना? राजनीतिक उत्पीड़न?"
संवैधानिक संस्थाओं से अपील
ममता बनर्जी ने इस मामले को लेकर देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं का ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने कहा, "मैं भारत के राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश और भारत के लोगों से पूछती हूं कि क्या हमारे संविधान में ऐसे भारत की कल्पना की गई थी?" उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री, जिसने संविधान को बनाए रखने की शपथ ली है, वह मुख्य विपक्षी दल की नेता की आजादी को सीमित करने की खुलेआम धमकी दे रहा है।
'तानाशाही की ओर बढ़ रहा देश'
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस घटना को एक बड़ी राजनीतिक लड़ाई का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ ममता बनर्जी का नहीं, बल्कि उस भारत का है जिसे भाजपा बनाना चाहती है। उनके अनुसार, यह एक ऐसा भारत है "जहां राजनीतिक विरोधियों को धमकाया जाता है, असहमति के लिए सजा दी जाती है, और संवैधानिक अधिकार सत्ता में बैठे लोगों द्वारा दी जाने वाली रियायतें बन जाते हैं।" उन्होंने इसे "एक खतरनाक तानाशाही भरा दौर" बताया।
अपनी बात समाप्त करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "सत्ता कुछ समय के लिए डरा-धमका सकती है, लेकिन अहंकार का जवाब आखिरकार जनता ही देती है। उनका अहंकार जोरदार है। उनकी हताशा उससे भी ज्यादा जोरदार है। उनके दिन गिने-चुने हैं।"
इनपुट: IANS



