गुजरात: चीनी साइबर गिरोह से जुड़े बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़, 33 करोड़ की ठगी में एक और गिरफ्तारी
गुजरात के सूरत में पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके तार चीनी गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, सूरत साइबर क्राइम सेल ने इस मामले में…
गुजरात के सूरत में पुलिस ने एक बड़े साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसके तार चीनी गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, सूरत साइबर क्राइम सेल ने इस मामले में चेन्नई के एक 39 वर्षीय मैनपावर सप्लायर को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर ठगी के पैसों के लिए बैंक खातों का इंतजाम करता था। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क ने देश के 14 राज्यों में लोगों को निशाना बनाकर 33.14 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी की है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान लवली उर्फ समीर उर्फ रिव अरोड़ा के रूप में हुई है, जो पहले गुरुग्राम में भी रह चुका था। पुलिस ने उसे तकनीकी सबूतों के आधार पर पकड़ा। यह कार्रवाई निवेश के नाम पर धोखाधड़ी के एक मामले की जांच के दौरान की गई, जिसमें एक व्यक्ति से 1.52 करोड़ रुपये ठगे गए थे।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लोगों को शेयर बाजार में डॉलर में निवेश कर भारी मुनाफे का लालच देता था। इसके लिए एक फर्जी ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक भेजा जाता था। जब पीड़ित वेबसाइट पर दिए गए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे जमा कर देता था, तो बाद में उसे अपनी रकम निकालने नहीं दी जाती थी। मुख्य मामला 14 नवंबर 2025 से 10 फरवरी 2026 के बीच हुई धोखाधड़ी से जुड़ा है। इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।
34 खातों से 33 करोड़ का लेनदेन
आरोपी अरोड़ा पहले से गिरफ्तार हो चुके लोगों से बैंक खाते हासिल करता था और हर लेनदेन पर उन्हें 3% कमीशन देता था। इसके बाद वह इन्हीं खातों को 3.5% कमीशन पर दुबई में बैठे एक फरार आरोपी को सौंप देता था। दुबई में बैठा यह शख्स चीनी साइबर गिरोह के साथ मिलकर काम करता था और ठगी की रकम को यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर इधर-उधर भेजता था। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की जांच में अरोड़ा से जुड़े 34 बैंक खातों का पता चला, जिनसे जुड़ी 113 शिकायतें 14 राज्यों में दर्ज थीं। इनमें कर्नाटक में सबसे ज्यादा 34, महाराष्ट्र में 11, और गुजरात व तमिलनाडु में 10-10 शिकायतें शामिल हैं।
डेटा एंट्री जॉब के नाम पर भी घोटाला
इस जांच में एक और घोटाले का खुलासा हुआ। अरोड़ा ने मुंबई, इंदौर, पटना, अहमदाबाद, बेंगलुरु और चेन्नई में कॉल सेंटर चला रखे थे। उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से नौकरी खोजने वाले 33 लाख से ज्यादा लोगों का डेटा 2 से 8 रुपये प्रति रिकॉर्ड के हिसाब से खरीदा था। टेली-कॉलर लोगों को घर बैठे डेटा एंट्री की नौकरी का झांसा देकर शुरुआत में 5,000 रुपये जमा कराते थे। बाद में काम में गलतियां बताकर पैसे नहीं लौटाए जाते थे। इस तरीके से 750 से ज्यादा लोगों से 35 लाख रुपये की ठगी की गई।
पुलिस को क्या-क्या मिला?
आरोपी के पास से एक लैपटॉप बरामद हुआ है जिसमें 33,88,646 लोगों का डेटा और जॉब एग्रीमेंट मिले हैं। इसके अलावा 14 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 4 सिम कार्ड और 57 सिम कार्ड कवर भी जब्त किए गए हैं। पुलिस ने बताया कि अरोड़ा लगभग 12 बार दुबई जा चुका है और उसके पास पहले वहां की नागरिकता भी थी। वह सूरत में दर्ज एक अन्य निवेश धोखाधड़ी के मामले में भी आरोपी है, जिसमें 15.44 लाख रुपये ठगे गए थे। इस मामले में चार अन्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
इनपुट: IANS



