मंगलवार, 25 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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वैक्सीन की सफलता का अनुमान अब पहले ही संभव? खून में छिपे हैं अहम संकेत

कोविड-19 की वैक्सीन किसी व्यक्ति पर कितनी असरदार होगी, इसका अंदाज़ा अब टीका लगने से पहले ही लगाया जा सकता है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हमारे खून में पहले से मौजूद कुछ एंटीबॉडी…

वैक्सीन की सफलता का अनुमान अब पहले ही संभव? खून में छिपे हैं अहम संकेत
(फोटो: IANS)

कोविड-19 की वैक्सीन किसी व्यक्ति पर कितनी असरदार होगी, इसका अंदाज़ा अब टीका लगने से पहले ही लगाया जा सकता है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हमारे खून में पहले से मौजूद कुछ एंटीबॉडी पैटर्न यह संकेत दे सकते हैं कि शरीर टीके के प्रति मजबूत प्रतिक्रिया देगा या कमजोर। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस खोज से भविष्य में टीकाकरण को हर व्यक्ति की ज़रूरत के हिसाब से ढालने में मदद मिल सकती है।

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यह शोध अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के सेरोनेट कार्यक्रम से जुड़े वैज्ञानिकों ने किया है और इसके नतीजे 20 अगस्त को 'सेल प्रेस ब्ल्यू जर्नल' में प्रकाशित हुए हैं। वैज्ञानिकों ने पाया कि हर व्यक्ति में टीके का असर अलग-अलग होता है, जिसके पीछे उम्र, लिंग, पुरानी बीमारियां और आनुवंशिक कारण हो सकते हैं। लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली टीका लगने से पहले ही अपनी संभावित प्रतिक्रिया के संकेत दे देती है।

खून के नमूनों और AI का विश्लेषण

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 4,000 से अधिक लोगों के 8,000 से ज़्यादा रक्त के नमूनों का विश्लेषण किया, जिसमें स्वस्थ और कमजोर इम्युनिटी वाले दोनों तरह के लोग शामिल थे। वैज्ञानिकों ने 185 अलग-अलग एंटीजन के खिलाफ शरीर में मौजूद एंटीबॉडी की जांच की और कोविड-19 वैक्सीन लेने से पहले और बाद के नमूनों की तुलना की।

इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके उन खास एंटीबॉडी पैटर्न को खोजा गया जो मजबूत और कमजोर वैक्सीन प्रतिक्रिया वाले लोगों में फर्क कर सकें। शोधकर्ताओं ने इन संकेतकों को ‘सेंटिनल एंटीबॉडी’ का नाम दिया है, जो किसी व्यक्ति की संभावित प्रतिरक्षा क्षमता का सूचक हो सकती हैं।

क्या कहती है यह नई खोज?

अध्ययन में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई कि कुछ सामान्य सूक्ष्मजीवों (जैसे स्टैफिलोकोकस ऑरियस, रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस-RSV और ह्यूमन पैराइन्फ्लुएंजा वायरस-3) के खिलाफ पहले से मौजूद एंटीबॉडी का उच्च स्तर, कोविड-19 वैक्सीन के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया से जुड़ा था।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मशीन लर्निंग आधारित मॉडल से उन लोगों की पहचान करना आसान हो सकता है, जिनमें टीकाकरण के बाद कमजोर इम्युनिटी विकसित होने की आशंका है। ऐसे लोगों के लिए खास टीके, बदली हुई खुराक या अतिरिक्त बूस्टर डोज़ पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह एक शुरुआती वैज्ञानिक आधार है और इसे चिकित्सा व्यवस्था में लागू करने से पहले और अधिक अध्ययन की आवश्यकता होगी।

इनपुट: IANS

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