ड्रोन से निपटने की अमेरिकी सेना की नई तैयारी, लेजर और माइक्रोवेव हथियारों का होगा साल भर परीक्षण
दुनिया भर में ड्रोन के बढ़ते सैन्य उपयोग के बीच अमेरिकी सेना दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने के लिए अपनी क्षमताओं को परखने की एक बड़ी तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना…
दुनिया भर में ड्रोन के बढ़ते सैन्य उपयोग के बीच अमेरिकी सेना दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने के लिए अपनी क्षमताओं को परखने की एक बड़ी तैयारी कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सेना हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का एक साल तक सघन परीक्षण करने की योजना बना रही है। इस महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य यह देखना है कि इन हथियारों को वास्तविक सैन्य ठिकानों पर कितनी कुशलता से तैनात और इस्तेमाल किया जा सकता है।
जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 के निदेशक, ब्रिगेडियर जनरल मैट रॉस ने मीडिया को बताया कि इन प्रणालियों को एक सैन्य अड्डे पर स्थापित किया जाएगा, जहाँ सैनिक 365 दिनों तक इनका संचालन और रखरखाव करेंगे। उन्होंने कहा, "यह एक डायरेक्टेड-एनर्जी पायलट प्रोजेक्ट है।" जनरल रॉस ने स्पष्ट किया कि यद्यपि 'डायरेक्टेड एनर्जी' एक व्यापक शब्द है, फिलहाल उनका ध्यान मुख्य रूप से हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव पर केंद्रित है।
परीक्षण का उद्देश्य और पैमाने
इस साल भर चलने वाले परीक्षण का मुख्य लक्ष्य यह पता लगाना है कि क्या ये हथियार सैन्य अड्डे के सामान्य कामकाज या आसपास के हवाई क्षेत्र में बिना कोई बाधा डाले भरोसेमंद तरीके से काम कर सकते हैं। जनरल रॉस के मुताबिक, शुरुआती परीक्षणों में यह साबित हो चुका है कि दोनों तकनीकें ड्रोन को नष्ट या निष्क्रिय कर सकती हैं।
उन्होंने कहा, "हमारे पास कई सिस्टम हैं और हमने साबित कर दिया है कि यह तकनीक काम करती है। हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव दोनों से ड्रोन को रोका जा सकता है। लेकिन अब हमें यह समझना है कि इन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में सफलतापूर्वक कैसे इस्तेमाल किया जाए।"
व्यावहारिक पहलुओं की जांच
यह परियोजना इन हथियारों की सिर्फ मारक क्षमता ही नहीं, बल्कि उनके व्यावहारिक पहलुओं का भी आकलन करेगी। अधिकारी यह देखेंगे कि इन सिस्टम को कितनी बिजली की आवश्यकता है, इनके रखरखाव और संचालन की लागत क्या है, और साल में ये कितने दिन पूरी तरह काम करने की स्थिति में रहते हैं। इसके अलावा, इनकी मरम्मत के लिए विशेषज्ञ कर्मचारियों की जरूरत कब और कितनी बार पड़ती है, इसका भी मूल्यांकन किया जाएगा।
जनरल रॉस ने कहा, "मैं चाहता हूं कि इन प्रणालियों को किसी सैन्य ठिकाने पर लगाया जाए और हमारे सैनिक खुद इन्हें चलाएं, इस्तेमाल करें और इनका रखरखाव करें। मैं यह जानना चाहता हूं कि 365 दिनों में इनकी बिजली की जरूरत कितनी रहती है।" इस डेटा से सेना पारंपरिक ड्रोन-रोधी तकनीकों के साथ इनकी प्रभावशीलता और किफायत की तुलना कर सकेगी।
ड्रोन: उपयोगी भी, खतरनाक भी
यूक्रेन जैसे संघर्षों में सस्ते ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल ने दुनियाभर में एंटी-ड्रोन तकनीक में रुचि बढ़ा दी है। लेजर सिस्टम एक बार में एक लक्ष्य को निशाना बना सकता है, जबकि माइक्रोवेव सिस्टम एक साथ कई ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को जाम कर सकता है।
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अधिकारी स्टीव विलॉबी ने कहा कि ड्रोन सार्वजनिक सुरक्षा के लिए उपयोगी हैं, लेकिन उनका गलत इस्तेमाल भी एक चुनौती है। उन्होंने कहा, "ड्रोन लोगों की सुरक्षा करते हैं, हमारी संपत्तियों की रक्षा करते हैं... दूसरी तरफ हमारी चुनौती यह है कि ड्रोन के अच्छे उपयोग को बढ़ावा दिया जाए और उनके गलत इस्तेमाल को रोका जाए।" अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन से निपटने की रणनीति में खतरों की रोकथाम, पहचान, निष्क्रिय करना, विस्फोटक सुरक्षा और खुफिया जानकारी जुटाना शामिल है।
इनपुट: IANS



