H-1B वीजा: अमेरिकी कंपनियों पर 1 लाख डॉलर से ज़्यादा के नए शुल्क का प्रस्ताव, भारतीयों पर होगा बड़ा असर
अमेरिका में विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीय आईटी विशेषज्ञों को नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा…
अमेरिका में विदेशी पेशेवरों, विशेषकर भारतीय आईटी विशेषज्ञों को नियुक्त करने वाली कंपनियों की लागत में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा याचिकाओं पर 1,03,265 डॉलर का एक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे कंपनियों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है।
यह प्रस्तावित शुल्क उन सभी 'कैप-सब्जेक्ट' एच-1बी याचिकाओं पर लागू होगा जो हर साल सीमित संख्या में जारी होने वाले वीजा के लिए दायर की जाती हैं। इसमें अमेरिकी संस्थानों से 'एडवांस्ड डिग्री' हासिल करने वाले आवेदकों के लिए आरक्षित कोटा भी शामिल है। अगर यह नियम लागू होता है, तो कंपनियों को वीजा याचिका दायर करते समय मौजूदा शुल्कों के अलावा यह भारी-भरकम राशि भी चुकानी होगी।
प्रस्ताव का उद्देश्य और प्रक्रिया
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (डीएचएस) के मुताबिक, इस कदम का मकसद कानूनी इमिग्रेशन सिस्टम को चलाने पर होने वाले खर्चों की भरपाई करना है, ताकि इसका बोझ करदाताओं पर न पड़े। यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) के प्रवक्ता जैक काहलर ने कहा कि इससे होने वाली आय का इस्तेमाल इमिग्रेशन आवेदनों की जांच, धोखाधड़ी की पहचान, राष्ट्रीय सुरक्षा जांच और सिस्टम के आधुनिकीकरण जैसे कामों में किया जाएगा। यह प्रस्ताव अभी अंतिम नहीं है; इसे फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित करने के बाद 30 दिनों के लिए आम लोगों और संस्थाओं की राय और आपत्तियों के लिए खोला जाएगा।
आर्थिक प्रभाव और अनुमान
डीएचएस का अनुमान है कि इस नए शुल्क से सरकार को सालाना करीब 8.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है। यह आकलन हर साल दायर होने वाली लगभग 85,000 एच-1बी याचिकाओं के आधार पर किया गया है। विभाग ने यह भी माना है कि इस नियम का लगभग 11,051 छोटी संस्थाओं पर "महत्वपूर्ण आर्थिक प्रभाव" पड़ेगा, जो विश्लेषण में शामिल कुल छोटी संस्थाओं का लगभग 76 प्रतिशत है।
हालांकि, यह शुल्क उन संस्थानों पर लागू नहीं होगा जो एच-1बी वीजा की वार्षिक सीमा (कैप) से छूट प्राप्त हैं, जैसे कुछ गैर-लाभकारी और सरकारी शोध संगठन व उच्च शिक्षा संस्थान।
प्रस्ताव की आलोचना
इमिग्रेशन सुधारों की वकालत करने वाले संगठन FWD.us के अध्यक्ष टॉड शुल्टे ने इस प्रस्ताव को 'अमेरिकी व्यवसायों पर भारी टैक्स' करार दिया है। उन्होंने चिंता जताई कि यह कदम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करने की अमेरिका की क्षमता को कमजोर कर सकता है, जिससे नौकरियां और कारोबार दूसरे देशों में जा सकते हैं। शुल्टे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार को किसी आवेदन की प्रोसेसिंग लागत से इतनी अधिक राशि वसूलने का कानूनी अधिकार है, और इसे "कानून का स्पष्ट उल्लंघन" बताया। हालांकि, डीएचएस का तर्क है कि अमेरिकी कानून सरकार को इमिग्रेशन सेवाओं की पूरी लागत वसूलने के लिए शुल्क निर्धारित करने की अनुमति देता है।
इनपुट: IANS



