भारत और उज्बेकिस्तान 1 अरब डॉलर के व्यापार को देंगे बढ़ावा, विदेश मंत्री जयशंकर ने संबंधों को बताया गहरा
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 1 अरब डॉलर के स्तर से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों के बीच यह सहमति सोमवार को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और…
भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 1 अरब डॉलर के स्तर से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों के बीच यह सहमति सोमवार को भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री सैदोव बख्तियार ओडिलोविच की मुलाकात के दौरान बनी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों नेताओं ने अपनी रणनीतिक साझेदारी की विस्तृत समीक्षा की। श्री सैदोव भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर हैं।
बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने उज्बेकिस्तान को भारत के 'बड़े पड़ोस' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लोगों, विचारों और वस्तुओं का निरंतर आदान-प्रदान होता रहा है, जिसकी जड़ें गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों में हैं। उन्होंने कहा, "मैं आपको बता सकता हूं, एक दोस्त के तौर पर, मैं आपको देखकर सच में बहुत खुश हूं और मुझे पूरा भरोसा है कि आज की हमारी मीटिंग निश्चित रूप से हमारे संबंधों को और गहरा करने में मदद करेगी।"
विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग
डॉ. जयशंकर ने पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय संबंधों में आई तेजी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि आज यह साझेदारी निर्माण, डिजिटल, ऊर्जा, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विविध क्षेत्रों तक फैल चुकी है, जिसे खनन के क्षेत्र में भी ले जाने की योजना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उज्बेक राष्ट्रपति के प्रति रखे जाने वाले विशेष सम्मान का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच करीबी संपर्क बना हुआ है।
संबंधों को और मजबूती देने के लिए भारत-उज्बेकिस्तान संसदीय मैत्री समूह (Parliamentary Friendship Group) के गठन की जानकारी भी दी गई, जिससे दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच नियमित संपर्क को बढ़ावा मिलेगा।
आतंकवाद और वैश्विक मुद्दों पर साझा रुख
विदेश नीति के मोर्चे पर, दोनों विकासशील देशों के बीच कई अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर समान विचार हैं। डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, "खासकर जब बात आतंकवाद, उग्रवाद और ड्रग तस्करी की आती है।" उन्होंने सीमा पार आतंकवाद के प्रति दोनों देशों के 'जीरो टॉलरेंस' के रुख को रेखांकित किया और आतंकवाद के सभी रूपों से लड़ने के लिए उज्बेकिस्तान सरकार के मजबूत स्टैंड की सराहना की।
इसके अतिरिक्त, भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान एक भागीदार देश के रूप में उज्बेकिस्तान के समर्थन की सराहना की। साथ ही, 2027-2029 की अवधि के लिए गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) की अध्यक्षता हेतु उज्बेकिस्तान की उम्मीदवारी को भारत ने अपना समर्थन देने की घोषणा की।
इनपुट: IANS



