सवाल 16- क्या आप जानते है, रामायण और महभारत के सबसे महाबली योद्धा कौन थे

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क्या आप जानते है, रामायण और महाभारत के सबसे महाबली योद्धा कौन थे

रामायण
रामायण हिन्दू स्मरण शक्ति का वह अंग हैं जिसके माध्यम से रघुवंश के राजा राम की गाथा कही गयी. यह कवि वाल्मीकि द्वारा लिखा गई है. संस्कृत का एक अनुपम महाकाव्य है। इसके लगभग 24,000 श्लोक हैं और इसके रचयिता महर्षि वाल्मीकि है, जिनको ‘आदिकवि’ भी कहा जाता है.


महाभारत
महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रंथ है, जो स्मृति के इतिहास में आता है और इसे कभी कभी केवल “भारत” कहा जाता है. यह काव्यग्रंथ भारत का धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ हैं. कहा जाता है कि हिन्दू मान्यताओं और पौराणिक संदर्भो एवं स्वयं महाभारत के अनुसार इस काव्य की रचाना वेदव्यास को माना जाता है.


शायद कुछ ही ऐसे लोग होगें जो महाभारत और रामायण से रूबरू न हो. लेकिन लगभग सभी लोग इनके के बारे में जानते है. कभी आपने सोचा है कि रामायण और महाभारत में सबसे महा-बलशाली योद्धा कौन- कौन से रहे होगें. जिन्हें युध्द में पाराजित करना बहुत मुशकिल होता था.
रामायण सबसे महाबली योद्धा


मेघनाद
मेघनाद लंका के राजा रावण का पुत्र था, जिसका जन्म मयकन्या तथा रावण की पटरानी मंदोदरी के गर्भ से हुआ था. भगवान ब्रह्मा ने इन्हे ‘मेघनाद’ नाम दिया था. मेघनाद बड़ा ही वीर तथा प्रतापी था. रामायण काल का ये अतिकाय योद्धा की गिनती सर्वश्रेष्ठ लड़ाका था. जिसे स्वयं दैत्य गुरु शुक्राचार्य जी ने अनुष्ठान करवाकर दिव्य आस्त्रो का ज्ञान दिया था. युध्द कला और रणनीति में निपुण किया था. जिसने कई प्रकार के ज्ञघ किये थे और माया युद्ध सीखे थे.
देवराज इंद्र को भी युद्ध में इसने पराजित किया था, इसीलिए इसे ‘इंद्रजित’ के नाम से भी जाना जाता है. मेघनाद ने राम और लक्ष्मण को दो बार युद्ध में परास्त किया था, किंतु अंत में वह लक्ष्मण के हाथों युद्ध के तीसरे दिन बड़े प्रयास के बाद मारा गया.
इंद्रजीत ने एक बार युध्द में देवराज इंद्र को भी पराजित कर बन्दी बना लिया था. जिस पर परमपिता ब्रम्हा के आदेश पर उसे आजाद किया जिस पर ब्रम्हा ने उसे दिव्य रथ दिया. जिस पर आरूढ़ मानव को जितना संभव नही था. इसके पास तीनो अंतिम शाक्ति ब्रम्हास्त्र, पशुपात अस्त्र, नारायण अस्त्र थे. जो इसे अतिमहारथी योद्धा बनाती है.


मेघनाद
मेघनाद लंका के राजा रावण का पुत्र था, जिसका जन्म मयकन्या तथा रावण की पटरानी मंदोदरी के गर्भ से हुआ था. भगवान ब्रह्मा ने इन्हे ‘मेघनाद’ नाम दिया था. मेघनाद बड़ा ही वीर तथा प्रतापी था. रामायण काल का ये अतिकाय योद्धा की गिनती सर्वश्रेष्ठ लड़ाका था. जिसे स्वयं दैत्य गुरु शुक्राचार्य जी ने अनुष्ठान करवाकर दिव्य आस्त्रो का ज्ञान दिया था. युध्द कला और रणनीति में निपुण किया था. जिसने कई प्रकार के ज्ञघ किये थे और माया युद्ध सीखे थे. देवराज इंद्र को भी युद्ध में इसने पराजित किया था, इसीलिए इसे ‘इंद्रजित’ के नाम से भी जाना जाता है. मेघनाद ने राम और लक्ष्मण को दो बार युद्ध में परास्त किया था, किंतु अंत में वह लक्ष्मण के हाथों युद्ध के तीसरे दिन बड़े प्रयास के बाद मारा गया.
इंद्रजीत ने एक बार युध्द में देवराज इंद्र को भी पराजित कर बन्दी बना लिया था. जिस पर परमपिता ब्रम्हा के आदेश पर उसे आजाद किया जिस पर ब्रम्हा ने उसे दिव्य रथ दिया. जिस पर आरूढ़ मानव को जितना संभव नही था. इसके पास तीनो अंतिम शाक्ति ब्रम्हास्त्र, पशुपात अस्त्र, नारायण अस्त्र थे. जो इसे अतिमहारथी योद्धा बनाती है.


रावण
रावण एक ऋषि पिता एवं रक्षिसि माता का पुत्र था. जो बालकाल से ही अत्यन्त बलशाली था. जिसने अपने दोनो भाइयो के साथ मिलकर परमपिता ब्रम्हा जी से वरदान प्राप्त किया था. कुछ समय के बाद रावन ने भगवान शिव की अराधना कर चंद्रहास खड्ग और कई दिव्य अस्त्र प्राप्त किया थे. जिसकी नाभि में अमृत था. जिसने सामवेद को लय दिया. जिसने गणेश को भी छल करने पर मजबूर कर दिया था.

बाली
वानर राज बाली एक आभुवपूर्व यौद्धा थे. इनहोने सागर मंथन के समय देवों कि सहायता की थी. जिससे खुश होकर देवराज इंद्राज ने उन्हें वर दिया कि शत्रु की आधी शक्ति उनमे आ जायेगी. वानर बाली ने रावण को भी पराजित किया था.

महाभारत के सबसे महाबली योद्धा


बर्बरीक

बर्बरीक महाभारत के एक महान योद्धा थे. वे घटोत्कच और अहिलावती के पुत्र थे. इस महाभारत काल के योद्धा ने आदिशक्ति को प्रसन्न कर दिव्य तीर प्राप्त किया था. जिससे बड़ी से बड़ी सेना को एक ही तीर से समाप्त किया जा सकता था.


अर्जुन
अर्जुन के बारे में अधिकतर लोग जानते होगें क्योंकि महाभारत के मुख्य पात्र अर्जुन ही थे. यह महाराज पाण्डु एवं रानी कुन्ती के वह तीसरे पुत्र थे. अर्जुन सबसे अच्छे धनुर्धर और द्रोणाचार्य के प्रमुख शिष्य थे. जीवन में अनेक अवसर पर उन्होने इसका परिचय भी दिया.


भीष्म
गंगा और शांतनु का पुत्र देवव्रत भगवान परशुराम के सर्वश्रेष्ठ शिष्य थे. इनको वेद कि शिक्षा देव गुरु वृहस्पति ने दी थी. इन्हें इच्छा मृत्यु के वरदान प्राप्त था, सत्यनिष्ठ एवं गुरुकृपा के कारण इनको इनकी इच्छा विरुद्ध पराजित करना संभव नही था.

यह भी पढ़ें : सवाल 14 – क्या आप जानते है, रावण को कैसे मिला अमर होने का वरदान

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