शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
देश

कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के नेताओं ने कर्नाटक से प्रतिदिन 3000 क्यूसेक पानी छोड़ने का किया आग्रह

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। तमिलनाडु के नेताओं ने कर्नाटक सरकार से फसलों को बचाने के लिए कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के…

कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु के नेताओं ने कर्नाटक से प्रतिदिन 3000 क्यूसेक पानी छोड़ने का किया आग्रह
(फोटो: IANS)

कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच दशकों पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। तमिलनाडु के नेताओं ने कर्नाटक सरकार से फसलों को बचाने के लिए कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के आदेश का पालन करने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर दिल्ली में कांग्रेस और एमडीएमके के सांसदों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

विज्ञापन

कांग्रेस नेता शशिकांत सेंथिल ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया विवाद नहीं है और पानी के बंटवारे पर फैसला पहले ही हो चुका है। उन्होंने कहा, "सब कुछ साफ है। विवाद पहले ही सुलझ चुका है। पानी के बंटवारे का फैसला हो चुका है। कावेरी जल संसाधन प्रबंधन बोर्ड का आदेश है कि कर्नाटक को हर दिन 3000 क्यूसेक पानी तमिलनाडु के लिए छोड़ना होगा, ताकि वहां की फसलें बच सकें। हम उम्मीद करते हैं और कर्नाटक सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह यह पानी तुरंत छोड़े। हम सरकार पर इस बात के लिए दबाव बना रहे हैं।"

कानूनी विकल्पों पर जोर

इस मामले पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कानूनी पहलुओं पर जोर दिया। उन्होंने IANS से कहा, "हर किसी के पास कानूनी विकल्प मौजूद हैं। जैसे कर्नाटक के पास कानूनी रास्ते हैं, वैसे ही तमिलनाडु के पास भी हैं। हमारा मानना है कि कावेरी प्रबंधन बोर्ड ने जो समझौता और आदेश दिया है, उसे पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए।"

विवाद की पृष्ठभूमि और पुराना फैसला

एमडीएमके के सांसद और प्रधान सचिव दुरई वाइको ने इस विवाद को 40 से 50 साल पुराना बताया। उन्होंने 2007 के ट्रिब्यूनल के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि ऊपरी राज्य होने के नाते यह कर्नाटक की ज़िम्मेदारी है कि वह तमिलनाडु को ज़रूरत के हिसाब से पानी उपलब्ध कराए।

उल्लेखनीय है कि कावेरी जल विवाद कर्नाटक, तमिलनाडु के अलावा केरल और पुडुचेरी के बीच भी दशकों से एक कानूनी और राजनीतिक मुद्दा रहा है। खासकर गर्मियों और सूखे के मौसम में जब पानी की कमी होती है, तो दोनों प्रमुख राज्यों में किसानों के बीच तनाव और विरोध प्रदर्शन बढ़ जाते हैं।

इनपुट: IANS

N

News4Social नेशनल डेस्क

News4Social नेशनल डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राष्ट्रीय घटनाक्रम से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →