मतदाता सूची विवाद: चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण पर कांग्रेस का हमला, मुख्य आयुक्त का इस्तीफा मांगा
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर चुनाव आयोग की सफाई के बाद कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस ने आयोग के प्रेस नोट को रक्षात्मक और अपर्याप्त बताते हुए मुख्य चुनाव…
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद पर चुनाव आयोग की सफाई के बाद कांग्रेस ने तीखा पलटवार किया है। कांग्रेस ने आयोग के प्रेस नोट को रक्षात्मक और अपर्याप्त बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि आयोग की लापरवाही से करोड़ों भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि चुनाव आयोग का 26 सितंबर का प्रेस नोट न तो खबर का सीधे तौर पर खंडन करता है और न ही उसके निष्कर्षों को गलत बताता है। उन्होंने कहा कि यह नोट मामले को हल्का करने की एक "रक्षात्मक कोशिश" है।
चुनाव आयोग की दलीलों पर कांग्रेस के सवाल
कांग्रेस ने आयोग के इस दावे पर सवाल उठाया कि गोवा में हटाए गए 97 में से 81 मतदाताओं को वापस जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पार्टी ने इसे एक "टूटी और भ्रष्ट व्यवस्था" का परिणाम बताते हुए कहा, "दूसरे शब्दों में आप एक टूटी और भ्रष्ट व्यवस्था से मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करते हैं और पकड़े जाने पर कहते हैं कि उन्हें वापस जोड़ा जा रहा है।"
पार्टी ने आयोग द्वारा अपने कदमों को सही ठहराने के लिए 27 मई 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देने को भी अपर्याप्त बताया। कांग्रेस के मुताबिक, यह आदेश हाल के खुलासों से बहुत पहले का है और यह CEC को मतदाताओं के नाम दुर्भावनापूर्ण तरीके से हटाने के आरोपों से नहीं बचा सकता।
अन्य राज्यों के मतदाताओं का क्या होगा?
जयराम रमेश ने इस बात पर भी जोर दिया कि आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में दावा-आपत्ति की समय-सीमा तो बढ़ाई है, लेकिन अन्य प्रभावित राज्यों का क्या होगा? उन्होंने पूछा, "कर्नाटक, तेलंगाना, बिहार और पश्चिम बंगाल के मतदाताओं का क्या? इन राज्यों में एक व्यक्ति के भ्रष्टाचार के कारण जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, क्या उन्हें जवाब नहीं मिलना चाहिए?"
कांग्रेस ने ECI-Net पोर्टल की समीक्षा के लिए विशेषज्ञों को शामिल करने के आयोग के फैसले को भी "निरर्थक सुरक्षा उपाय" करार दिया। पार्टी का कहना है कि असली चिंता पोर्टल की तकनीकी मजबूती नहीं, बल्कि इसका केंद्रीकरण है, जो जमीनी स्तर पर मतदाताओं को जोड़ने से रोकता है।
युवा मतदाताओं को निशाना बनाने का आरोप
कांग्रेस ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि आयोग का प्रेस नोट युवा (जेन जी) मतदाताओं को जानबूझकर निशाना बनाने के सवालों का जवाब देने में विफल रहा है। पार्टी के अनुसार, जुलाई 2026 के मध्य से फॉर्म-6 में अवैध बदलाव किए गए, जिससे नए मतदाताओं पर अपने माता-पिता या दादा-दादी का विवरण देने का अनुचित बोझ डाला गया।
इन सभी मुद्दों को उठाते हुए कांग्रेस ने मांग की है कि SIR प्रक्रिया को तत्काल निलंबित किया जाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या उन पर मुकदमा चलाया जाए।
इनपुट: IANS



