कर्नाटक: CM शिवकुमार ने चुनाव आयोग को बताया 'वोट चोर', राष्ट्रपति से की भंग करने की मांग
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर 'वोट चोरी में भागीदार' बताया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बेंगलुरु के…
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ मिलकर 'वोट चोरी में भागीदार' बताया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने और चुनाव आयोग को भंग करने की मांग की।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक स्वायत्तता का दुरुपयोग कर रहा है और भाजपा की 'कठपुतली' बन गया है। शिवकुमार ने कहा, “वे भाजपा के साथ मिलकर मत चोरी में भागीदार बन गए हैं। गरीब मतदाताओं और प्रशासन की आलोचना करने वालों के नामों को निशाना बनाया जा रहा है।”
मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
शिवकुमार ने मतदाता सूची के चल रहे विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) को तत्काल रद्द करने की मांग की। उनके अनुसार, इस प्रक्रिया के कारण राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में भारी गिरावट आई है। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि कर्नाटक की करीब सात करोड़ की आबादी में 5.54 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद यह संख्या घटकर 4.46 करोड़ रह गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 30-40 लाख लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
उन्होंने बेंगलुरु केंद्रीय लोकसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मंसूर खान 31,000 वोटों से हारे, जबकि एसआईआर प्रक्रिया के जरिए 12 लाख वोट काट दिए गए। शिवकुमार ने भाजपा नेताओं से इस कटौती पर सवाल किया और आरोप लगाया कि अकेले महादेवपुरा में तीन लाख वोट गायब हो गए हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर व्यक्तिगत निशाना
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की भी मांग की और उन पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा, “आप मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं, बल्कि मुख्य चयन आयुक्त हैं।” शिवकुमार ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त सदस्यों ने अपनी अंतरात्मा के आधार पर काम करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के कुछ निर्णयों का विरोध किया है।
उन्होंने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर चर्चा के लिए संसद का सत्र बुलाने का आग्रह करते हुए कहा, “सत्ता का यह जुनून हमेशा नहीं टिकेगा।” शिवकुमार ने जोर देकर कहा कि मतदान हर व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार है और वे इसे छीनने नहीं देंगे।
इनपुट: IANS



