राज्यसभा सदस्य बनने के लिए पढ़ा लिखा होना चाहिए या नहीं ?
भारत एक लोकतांत्रिक देश है. जहां पर लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि सरकार चलाते हैं. इनमें से कुछ प्रतिनिधि प्रत्यक्ष तौर पर चुने जाते हैं.
भारत एक लोकतांत्रिक देश है. जहां पर लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि सरकार चलाते हैं. इनमें से कुछ प्रतिनिधि प्रत्यक्ष तौर पर चुने जाते हैं. कुछ अप्रत्यक्ष तौर पर चुने जाते हैं. भारत सरकार की बात करें, तो इसके 2 सदन होते हैं. एक राज्यसभा होती है. जिसको हम उच्च सदन भी कहते हैं. इसके अलावा दूसरा सदन लोकसभा होती है. इसे हम निम्न सदन भी कहते हैं. भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली में इनका इतना महत्व होने के कारण लोगों के मन में इनके प्रति बहुत जिज्ञासा रहती है. इसी कारण आमतौर पर लोगों के मन में सवाल होता है कि राज्यसभा सदस्य बनने के लिए पढ़ा लिखा होना चाहिए या नहीं ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

राज्यसभा सदस्य बनने के लिए पढ़ा लिखा होना चाहिए या नहीं -
वैसे किसी भी विधायक , सासंद तथा सम्मानित पद पर बैठे हुए व्यक्ति को पढ़ा लिखा होना चाहिएं यह देश के लिए अच्छी बात है. लेकिन अगर बात की जाए कि क्या कोई सदस्य पढ़ा-लिखा नहीं है, तो क्या वह राज्यसभा का सदस्य बन सकता है. इसका जवाब होगा- हाँ बिल्कुल बन सकता है. शिक्षित होना राज्यसभा के सदस्यों के लिए कोई अनिवार्य योग्यता नहीं है. कोई भी व्यक्ति जो भारत का नागरिक है तथा इसके अलावा जो शर्ते या योग्यता निर्धारित की गई हैं. उनको पूरा करता है, तो वह शिक्षित नहीं है, तो भी वह राज्यसभा का सदस्य बन सकता है.

क्यों कहा जाता है राज्यसभा को उच्च सदन या स्थाई सदन-
काफी लोगों के मन में सवाल होता है कि लोकसभा को निम्न या अस्थाई सदन तथा राज्यसभा को उच्च या स्थाई सदन क्यों कहा जाता है. दरअसल, लोकसभा की बात करें, तो लोकसभा को कभी भी भंग किया जा सकता है. इसके अलावा राज्यसभा की बात करें, तो इसको कभी भी भंग नहीं किया जा सकता है. इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है. इसके साथ ही इसके एक तिहाई सदस्यों का प्रत्येक 2 वर्ष के बाद कार्यकाल पूरा हो जाता है तथा नए सदस्यों की नियुक्ति होती है. इसके कभी ना भंग होने के कारण ही इसको स्थाई और उच्च सदन कहा जाता है.
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भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है तथा इसके सदस्य अपने में से ही एक उपसभापति का चयन करते हैं. इसके साथ ही अगर राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए आयु सीमा की बात करें, तो इसके लिए कम से कम 30 वर्ष की आयु होना अनिवार्य है. राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है. इसकी एक अनिवार्य शर्त यह है कि वह दिवालिया घोषित किया हुआ ना हो.
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