मंगलवार, 14 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने बताया, कैसे चुनाव में अखबारों से कैश और फर्जी पार्टियों से बांटे जाते थे पैसे

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एस.वाई. कुरैशी ने खुलासा किया है कि उनके कार्यकाल में चुनावों के दौरान धनबल का बढ़ता प्रभाव एक बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि किस तरह मतदाताओं को लुभान

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने बताया, कैसे चुनाव में अखबारों से कैश और फर्जी पार्टियों से बांटे जाते थे पैसे
(फोटो: IANS)

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) एस.वाई. कुरैशी ने खुलासा किया है कि उनके कार्यकाल में चुनावों के दौरान धनबल का बढ़ता प्रभाव एक बहुत बड़ी चुनौती थी। उन्होंने बताया कि किस तरह मतदाताओं को लुभाने के लिए अखबारों में नकदी छिपाने से लेकर फर्जी शादी और जन्मदिन की पार्टियों जैसे अनूठे हथकंडे अपनाए जाते थे।

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समाचार एजेंसी IANS को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कुरैशी ने याद किया कि जब उन्होंने 2010 में चुनाव आयोग का नेतृत्व संभाला, तो उनकी दो प्रमुख प्राथमिकताएं थीं। पहली, चुनावों में पैसे के बढ़ते इस्तेमाल पर लगाम लगाना और दूसरी, शिक्षित शहरी मतदाताओं के बीच मतदान के प्रति उदासीनता को दूर करना।

धनबल रोकने के लिए बने विशेष प्रभाग

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने एक दोहरी रणनीति अपनाई। कुरैशी के अनुसार, आयोग के भीतर दो नए और समर्पित प्रभाग बनाए गए। एक प्रभाग 'मतदाता जागरूकता' के लिए था, जिसका नेतृत्व सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से लाए गए एक पेशेवर अधिकारी को सौंपा गया।

दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण प्रभाग 'व्यय निगरानी प्रभाग' था। इसकी कमान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से आयकर सेवा के एक अधिकारी को दी गई। एस.वाई. कुरैशी ने बताया, "हमारा उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई से अधिक रोकथाम पर था।" इसलिए इस प्रभाग ने नियम और दिशानिर्देश तैयार किए, उनका व्यापक प्रचार किया और राजनीतिक दलों को प्रशिक्षण भी दिया ताकि वे अनजाने में कोई गलती न करें।

40 तरीकों से होता था पैसों का इस्तेमाल

पूर्व सीईसी ने अपनी पुस्तक 'एन अनडॉक्यूमेंटेड वंडर: द मेकिंग ऑफ द ग्रेट इंडियन इलेक्शन' का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने धनबल के दुरुपयोग के 40 अलग-अलग तौर-तरीकों की पहचान की थी। इनमें घर-घर जाकर पैसे पहुंचाना, अखबारों के पन्नों के बीच नकदी रखना और मतदाताओं को सोने की चेन देना जैसे तरीके शामिल थे।

इन निगरानी उपायों के शुरुआती नतीजे काफी सफल रहे। कुरैशी ने बताया, "शुरुआत में हमें काफी सफलता मिली। पहले करोड़ों रुपये और बाद में सैकड़ों करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि समय के साथ धन बांटने के नए-नए तरीके विकसित हुए होंगे, और इस समस्या पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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