मंगलवार, 14 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
अपराध

दिल्ली दंगा: IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 23 जुलाई से सज़ा पर बहस

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में एक अहम फैसला आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिल्ली की कड़कड़डूमा को

दिल्ली दंगा: IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन समेत 5 दोषी करार, 23 जुलाई से सज़ा पर बहस
(फोटो: IANS)

साल 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में एक अहम फैसला आया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता ताहिर हुसैन समेत पांच लोगों को इस मामले में दोषी ठहराया है। अदालत अब 23 जुलाई से दोषियों को दी जाने वाली सज़ा की अवधि पर सुनवाई शुरू करेगी।

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अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी थी कि दंगों के दौरान एक हिंसक भीड़ ने अंकित शर्मा पर हमला किया था, जिससे उनकी जान चली गई। लंबी कानूनी प्रक्रिया और पेश किए गए सबूतों की पड़ताल के बाद अदालत ने ताहिर हुसैन और चार अन्य आरोपियों को दोषी करार देने का फैसला सुनाया। अब सज़ा तय करने के लिए अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस अदालती फैसले पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की ओर से भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने IANS से कहा, "फरवरी 2020 की घटनाओं ने दिखाया कि दंगों के दौरान छतों पर हथियार, पेट्रोल बम, पत्थर और अन्य हमलावर सामग्री पहले से जुटाई गई थी। ताहिर हुसैन का परिसर किसी सामान्य घर की तरह नहीं, बल्कि हिंसक गतिविधियों के केंद्र जैसा दिखाई देता था। वहां एकत्र लोगों ने स्थानीय हिंदू समुदाय को निशाना बनाया और उनके घरों पर हमले किए।"

वहीं, शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करने वाला बताया। उन्होंने कहा, "दोषियों को सजा मिलना न्याय व्यवस्था में विश्वास को मजबूत करता है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर फैसला दिया है और अंकित शर्मा के परिवार को न्याय मिलना सबसे महत्वपूर्ण है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसे न्याय के नजरिए से देखा जाना चाहिए, न कि राजनीतिक लाभ के लिए। चतुर्वेदी ने उम्मीद जताई कि यदि फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती दी जाती है, तो अभियोजन पक्ष मजबूती से अपना केस रखेगा ताकि पीड़ित परिवार को अंतिम न्याय मिल सके।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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