मंगलवार, 14 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भारत के बड़े शहरों में महंगे घरों के दाम आसमान पर, नोएडा में 28% तक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी

भारत के प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते देश के प्रमुख शहरों में महंगे घरों के ब

भारत के बड़े शहरों में महंगे घरों के दाम आसमान पर, नोएडा में 28% तक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
(फोटो: IANS)

भारत के प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर अस्थिरता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में रुकावटों के चलते देश के प्रमुख शहरों में महंगे घरों के बाज़ार मूल्य में 28 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह रुझान खासकर उन प्रॉपर्टीज़ में मज़बूत है जो आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और अच्छी कनेक्टिविटी वाले इलाकों में स्थित हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की पहली छमाही तक भारत में प्रीमियम घरों के दाम में यह इज़ाफ़ा हुआ है। सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी नोएडा में देखने को मिली, जहाँ निर्माणाधीन प्रीमियम घरों की कीमतों में सालाना आधार पर 4 से 28 प्रतिशत की तेज़ी आई। वहीं, देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में इसी सेगमेंट में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

शहरों में अलग-अलग रहा रुझान

अन्य प्रमुख शहरों में भी प्रीमियम प्रॉपर्टी महंगी हुई है, लेकिन बढ़ोतरी की दर अलग-अलग रही। गुरुग्राम में सालाना आधार पर लगभग 2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बेंगलुरु में प्रॉपर्टी की कीमत 3 से 11 प्रतिशत तक बढ़ गई।

तैयार हो चुके लग्ज़री घरों (रेडी-टू-मूव) के मामले में दिल्ली सबसे आगे रही, जहाँ लग्ज़री फ्लोर्स की औसत कीमत में सालाना 10 से 25 प्रतिशत का उछाल आया। इसके बाद बेंगलुरु में 8-10 प्रतिशत और मुंबई में 2-7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

अब गुणवत्ता पर है खरीदारों का ज़ोर

सैविल्स इंडिया में रेजिडेंशियल सर्विसेज की मैनेजिंग डायरेक्टर श्वेता जैन ने इस बदलाव पर टिप्पणी करते हुए कहा, "खरीददार अब अधिक समझदार हो रहे हैं और लोकेशन, प्रोडक्ट की क्वालिटी और डेवलपर की विश्वसनीयता पर अधिक जोर दे रहे हैं। इससे पता चलता है कि अब मांग क्वालिटी पर आधारित हो रही है।"

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाज़ार अब सिर्फ कीमतों में तेज़ी के दौर से आगे बढ़कर एक स्थायी मूल्य-निर्माण (sustainable value creation) की दिशा में जा रहा है। इसे लोगों की बढ़ती आय, बेहतर सुविधाओं की मांग और गुणवत्ता को प्राथमिकता देने जैसे कारक मज़बूती दे रहे हैं।

इनपुट: IANS

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