बुधवार, 23 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क भाषण पर विपक्ष का तंज, 'यह उपदेश भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं को दें'

न्यूयॉर्क में दिए गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता पर भाषण ने भारत में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए…

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क भाषण पर विपक्ष का तंज, 'यह उपदेश भाजपा और संघ कार्यकर्ताओं को दें'
(फोटो: IANS)

न्यूयॉर्क में दिए गए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हिंदू-मुस्लिम एकता पर भाषण ने भारत में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों के कई नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भागवत को यह बातें अमेरिका में नहीं, बल्कि भारत में अपने संगठन और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं को समझानी चाहिए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, नेताओं ने भागवत के बयान के समय और स्थान पर सवाल उठाए हैं।

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कांग्रेस के कई नेताओं ने भागवत के भाषण की आलोचना की। सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, "वे बदले हुए लहजे में भाषण देकर लौटे हैं।" उन्होंने यह भी दावा किया कि भागवत को उस जगह बोलने की अनुमति नहीं मिली जहाँ वे चाहते थे, इसलिए उन्होंने एक छोटे कमरे में अपनी बात कही और उन्हें सुनने के लिए लोग भी नहीं आए। तिवारी ने भारत के संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि यह लिंग, धर्म, जाति और भाषा के भेदभाव के बिना सभी को समानता की गारंटी देता है।

विपक्ष ने उठाए दोहरे चरित्र पर सवाल

कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने सवाल किया, "वे अमेरिका में क्यों भाषण देते हैं? उनको यह भाषण भाजपा और संघ के सभी कार्यकर्ताओं को देना चाहिए।" उन्होंने आरोप लगाया कि वे देश को बचाने की बजाय बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस के एक अन्य नेता उदित राज ने इसे 'दोहरा चरित्र' और 'हिप्पोक्रेसी' की सीमा बताया। उन्होंने कहा कि भागवत न्यूयॉर्क में गरीबी दूर करने की बात कर रहे हैं, जबकि भारत में 80 करोड़ से ज्यादा लोग गरीब हैं।

अन्य विपक्षी दलों ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं। समाजवादी पार्टी के सांसद हरेंद्र सिंह मलिक ने सुझाव दिया कि यह बेहतर होगा कि मोहन भागवत अपने ये निर्देश भाजपा कार्यकर्ताओं और उनके मुख्यमंत्रियों-मंत्रियों को दें। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सौगत रॉय ने कहा, "यह अच्छी बात है। हम सभी चाहते हैं कि भारत में एकता और विविधता बनी रहे। लेकिन मुझे नहीं पता कि मोहन भागवत ने जो कहा है, उस पर वे सच में यकीन करते हैं या नहीं।"

संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी का आरोप

DMK नेता टी.के.एस. इलांगोवन ने कहा कि उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है कि संविधान क्या कहता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा, "संविधान हर भारतीय नागरिक को किसी भी धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार-प्रसार करने का मौलिक अधिकार देता है... लेकिन उन्हें इन संवैधानिक अधिकारों की कोई परवाह नहीं है। वे असभ्य लोगों जैसा व्यवहार कर रहे हैं।"

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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