पंजाब: नशा-विरोधी कार्यकर्ता की हत्या पर सियासी घमासान, प्रवेश वर्मा ने मांगा भगवंत मान का इस्तीफा
पंजाब के मानसा में नशा-विरोधी अभियान चलाने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना को लेकर दिल्ली सरकार…
पंजाब के मानसा में नशा-विरोधी अभियान चलाने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या के बाद राज्य की सियासत गरमा गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना को लेकर दिल्ली सरकार के मंत्री और भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सीएम मान से तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
एक वीडियो संदेश जारी कर प्रवेश वर्मा ने कहा, "अगर थोड़ी भी शर्म बची है तो भगवंत मान को आज ही इस्तीफा दे देना चाहिए।" उन्होंने कहा कि मानसा में ड्रग्स के खिलाफ आवाज उठाने वाले सरदार परमिंदर सिंह की माफिया द्वारा हत्या कर दी गई, जिसका वीडियो पूरे देश ने देखा है। वर्मा ने अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें दिल्ली में युवाओं की राजनीति की बात करने की बजाय पंजाब जाकर वहां के युवाओं के लिए संघर्ष करना चाहिए।
विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा
इस हत्याकांड को लेकर सिर्फ भाजपा ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल समेत अन्य विपक्षी दलों ने भी भगवंत मान सरकार की कड़ी आलोचना की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे कानून-व्यवस्था की बड़ी विफलता करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नशे के खिलाफ लड़ने वाले ही सुरक्षित नहीं हैं, तो पंजाब में कौन सुरक्षित है। कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी घटना की निंदा करते हुए राज्य सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
मृतक के पिता के गंभीर आरोप
प्रवेश वर्मा ने यह भी दावा किया कि मृतक परमिंदर सिंह के पिता ने इस हत्या के लिए सीधे तौर पर मानसा के स्थानीय विधायक, मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार ठहराया है। वर्मा ने कहा, "भगवान इन्हें इंसाफ देगा ही, लेकिन उससे पहले पंजाब की जनता भी इंसाफ करेगी।"
कौन थे परमिंदर सिंह झोटा?
परमिंदर सिंह झोटा 'नशा विरोधी टास्क फोर्स' से जुड़े थे और क्षेत्र में ड्रग तस्करी व नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चला रहे थे। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, एक मेडिकल स्टोर संचालक ने नशा-विरोधी गतिविधियों को लेकर हुए विवाद के बाद कथित तौर पर उन्हें गोली मार दी थी। इस घटना ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इनपुट: IANS



