बुधवार, 1 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी से इनकार किया, CBI जांच की मांग

राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला अब अदालत की दहलीज़ तक पहुँचने से पहले ही कानूनी जगत में एक नई सुर्खी बन गया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने इस प्रकरण में एक कड़ा रुख अपनाते हुए एला

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: फैजाबाद बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी से इनकार किया, CBI जांच की मांग
(फोटो: IANS)

राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला अब अदालत की दहलीज़ तक पहुँचने से पहले ही कानूनी जगत में एक नई सुर्खी बन गया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने इस प्रकरण में एक कड़ा रुख अपनाते हुए एलान किया है कि उसका कोई भी सदस्य अधिवक्ता इस मामले के आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी नहीं करेगा।

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IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि यह निर्णय अधिवक्ता संघ की बैठक में विधिवत प्रस्ताव पारित कर लिया गया है।

पैरवी करने पर देना होगा पाँच लाख रुपये

कालिका मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यदि संघ का कोई सदस्य अधिवक्ता इस प्रतिबंध के बावजूद किसी आरोपी का वकालतनामा दाखिल करता है, तो उसे प्रति आरोपी पाँच लाख रुपये की सहयोग राशि बार एसोसिएशन के पास जमा करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस राशि का उपयोग अभियोजन पक्ष के कानूनी खर्चों में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यदि कोई बाहरी अधिवक्ता आरोपियों की पैरवी के लिए आगे आता है, तो अधिवक्ता संघ उसका विरोध करेगा और यह भी जाँचेगा कि वह सरकार, विश्व हिंदू परिषद या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से किसी रूप में जुड़ा है या नहीं।

अभियोजन के लिए 15 वकीलों का विशेष पैनल

संघ ने मामले में प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए लगभग 15 अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया है, जो अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी करेगा। इसके अलावा 12 अन्य लोगों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जो चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए आवेदन देंगे। कालिका मिश्रा ने आगाह किया कि यदि संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई, तो अधिवक्ता संघ अदालत का दरवाज़ा खटखटाएगा और उनके अयोध्या से बाहर जाने पर रोक लगाने की माँग भी करेगा।

CBI जाँच की माँग, SIT पर सवाल

फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने पूरे मामले की जाँच केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से कराने की माँग दोहराई। उनका कहना है कि निष्पक्ष जाँच के लिए केंद्रीय एजेंसी की भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने CBI जाँच से बचने के उद्देश्य से SIT का गठन किया है। मिश्रा ने बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस संबंध में याचिकाएँ पहले से लंबित हैं। यदि अदालत CBI जाँच का आदेश नहीं देती, तो संघ स्वयं आगे कानूनी कदम उठाएगा।

जाँच का दायरा सीमित न रहे: संघ

कालिका मिश्रा ने ज़ोर देकर कहा कि जाँच केवल अभी गिरफ्तार आरोपियों तक सिमटी नहीं रहनी चाहिए — जाँच के दौरान जो भी अन्य नाम सामने आएँ, उन पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ का यह निर्णय किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने की मंशा से नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर जनमानस में कई सवाल और आशंकाएँ हैं, और CBI जाँच ही इन्हें दूर कर सकती है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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