गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

NEET-UG विवाद: स्वास्थ्य मंत्री नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस से भड़का सियासी संग्राम, विपक्ष और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद नीट-यूजी और पेपर लीक मामले पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच…

NEET-UG विवाद: स्वास्थ्य मंत्री नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस से भड़का सियासी संग्राम, विपक्ष और भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप
(फोटो: IANS)

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद नीट-यूजी और पेपर लीक मामले पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी हुई। जहां विपक्ष ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने और जवाबदेही से भागने का आरोप लगाया, वहीं भाजपा ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर छात्रों के भविष्य पर राजनीति करने का इल्जाम लगाया।

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विपक्ष ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल

विपक्षी दलों ने सरकार के रवैये की कड़ी आलोचना की है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब देश में आंदोलन और राजनीति भी सरकार की मर्जी से होगी। उन्होंने सवाल किया, "लाखों छात्र अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पहुंचते हैं तो सरकार उनसे संवाद करने के बजाय बल प्रयोग क्यों करती है।" उन्होंने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज पर सरकार द्वारा माफी न मांगने और पेपर लीक के दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई न होने का भी आरोप लगाया। सुधाकर सिंह ने नीट मामले के मुख्य आरोपी संजीव मुखिया के खिलाफ समय पर चार्जशीट दाखिल न होने का मुद्दा भी उठाया।

इसी तरह, कांग्रेस नेता सुखदेव भगत ने कहा कि पेपर लीक से करोड़ों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है और ऐसे मुद्दे उठाना राजनीति नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी दो साल से यह मुद्दा उठा रहे हैं, लेकिन सरकार संवेदनहीन है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने भी एक अहम सवाल खड़ा किया। उन्होंने पूछा कि जब आंदोलन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ है तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा जवाब क्यों दे रहे हैं। उन्होंने एनटीए की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसे सोसाइटी की तरह चलाया जा रहा है, जबकि इसे एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था होना चाहिए था।

भाजपा का विपक्ष पर पलटवार

विपक्षी हमलों का जवाब देते हुए भाजपा ने कांग्रेस और अन्य दलों पर इस संवेदनशील मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता आरपी सिंह ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर विषय को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र सरकार इसी साल 2024 में पेपर लीक रोकने के लिए एक सख्त कानून लेकर आई थी, जिसे संसद ने पारित किया था। आरपी सिंह ने दावा किया कि उस समय राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने इस कानून पर कोई सुझाव नहीं दिया था और अब वे ही इस पर राजनीति कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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