अयोध्या: राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक आज, स्थानीय संतों को शामिल करने की मांग ने पकड़ा ज़ोर
अयोध्या में बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें कई अहम फैसले लिए जाने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक के…
अयोध्या में बुधवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें कई अहम फैसले लिए जाने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक के एजेंडे में ट्रस्ट के खाली पदों को भरना और पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति जैसे विषय शामिल हो सकते हैं। बैठक से ठीक पहले, अयोध्या के स्थानीय संत समाज ने ट्रस्ट में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है।
संतों की प्रमुख मांग है कि ट्रस्ट में रामानंदी वैष्णव परंपरा से जुड़े और अयोध्या के स्थानीय प्रतिनिधियों को ही जगह दी जाए। साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने कहा कि उन्हें ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास पर पूरा भरोसा है और वे उम्मीद करते हैं कि नए सदस्य रामानंदी परंपरा से ही होंगे। उनका मानना है कि इससे भगवान रामलला की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का संचालन सही तरीके से सुनिश्चित हो सकेगा।
संत समाज की क्या हैं मांगें?
महंत सीताराम दास के अनुसार, संत समाज लंबे समय से यह मांग कर रहा है कि ट्रस्ट में उन लोगों को प्राथमिकता मिले जो अयोध्या की धार्मिक परंपराओं से गहरे जुड़े रहे हैं और राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। इसी मुद्दे पर आगे की रणनीति बनाने के लिए 23 जुलाई को संत समाज की एक अलग बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें ट्रस्ट के फैसलों की समीक्षा की जाएगी।
इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए रामदल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने भी रिक्त पदों पर स्थानीय और आंदोलन से जुड़े लोगों की नियुक्ति की अपील की है। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों के लोगों को शामिल करने से स्थानीय समाज की भावनाएं आहत होती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पहले भी ऐसा होने से विवाद हुए, जिसका खामियाजा अयोध्या को भुगतना पड़ा।
बैठक का महत्व और भविष्य की दिशा
कल्कि राम ने इस बैठक को ट्रस्ट को लेकर फैली अफवाहों और आशंकाओं को दूर करने का एक अवसर बताया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की बढ़ती उम्र को देखते हुए, उनके उत्तराधिकारी के तौर पर महंत कमलनयन दास को जिम्मेदारी सौंपने पर विचार किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर, यह बैठक न केवल ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे को पूरा करेगी, बल्कि अयोध्या के संत समाज के साथ उसके संबंधों की दिशा भी तय करेगी।
इनपुट: IANS



