मंगलवार, 29 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-अमेरिका व्यापार सौदा लगभग तय, पर अमेरिकी टैरिफ नीति बनी अड़चन: एस. जयशंकर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते को लेकर मोटे तौर पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नीति में हुए हालिया बदलावों के कारण इसे अंतिम रूप…

भारत-अमेरिका व्यापार सौदा लगभग तय, पर अमेरिकी टैरिफ नीति बनी अड़चन: एस. जयशंकर
(फोटो: IANS)

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते को लेकर मोटे तौर पर सहमति बन चुकी है, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नीति में हुए हालिया बदलावों के कारण इसे अंतिम रूप देने के समय को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जयशंकर ने इस प्रस्तावित समझौते को काफी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि अगर यह सफल होता है तो दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर दिशा देने में बड़ी मदद मिलेगी।

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एक सवाल-जवाब सत्र के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया, "हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं, जहां ट्रेड समझौते को लेकर कमोबेश सहमति बन चुकी है।" उन्होंने कहा कि अब सवाल यह है कि अमेरिकी पक्ष में क्या बदलाव आया है। जयशंकर ने अमेरिका की बदली हुई टैरिफ नीति और 'सेक्शन 301' के तहत चल रही प्रक्रिया का जिक्र किया। इन वजहों से भारत को यह तय करना पड़ रहा है कि लंबे समय से चल रही बातचीत को अंतिम रूप देने का सही समय क्या हो।

समझौते की राह में अन्य चुनौतियां

विदेश मंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि भारत की अर्थव्यवस्था की अपनी जटिलताएं भी इस समझौते में देरी का एक कारण रहीं। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ी संख्या में छोटे किसान और निर्माता हैं, और यहां का उत्पादन ढांचा अमेरिका से बहुत अलग है। उनके मुताबिक, "ट्रेड वार्ता में कुछ हद तक धैर्य की जरूरत होती है और हर पहलू को बारीकी से देखना पड़ता है, ताकि बातचीत को सही नतीजे तक पहुंचाया जा सके।"

रिश्तों को प्रभावित करने वाले मुद्दे

जयशंकर ने उन दो अन्य प्रमुख मुद्दों पर भी बात की जो भारत-अमेरिका संबंधों पर असर डालते हैं — आतंकवाद और लोगों की आवाजाही (मोबिलिटी)। उन्होंने कहा कि आतंकवाद भारत के लिए एक बहुत बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि देश ने कई सालों तक पड़ोसी देश से होने वाले हमलों का सामना किया है। उन्होंने जोर देकर कहा, "अगर मेरी सबसे बड़ी चिंताओं में से किसी एक को मेरा साझेदार पूरी तरह नहीं समझता है, तो जाहिर तौर पर इसका असर हमारे रिश्तों पर पड़ेगा।"

लोगों की आवाजाही के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इससे होने वाले आर्थिक फायदों का अमेरिका के कुछ हिस्सों में राजनीतिक चिंताओं से टकराव हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भी आम लोगों की नजर में भारत-अमेरिका संबंधों की धारणा को प्रभावित करता है। जयशंकर के मुताबिक, लोकतांत्रिक देशों में अब कूटनीति सिर्फ सरकारों तक सीमित नहीं रह सकती, क्योंकि जनता की राय की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।

इनपुट: IANS

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