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संभल जामा मस्जिद सर्वे: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी की, अब फैसले का इंतज़ार

उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने सभी पक्षों की…

संभल जामा मस्जिद सर्वे: सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई पूरी की, अब फैसले का इंतज़ार
(फोटो: IANS)

उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह निर्णय लिया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मामला मस्जिद की इंतजामिया समिति द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती देने के बाद शीर्ष अदालत पहुंचा था।

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यह पूरा विवाद एक सिविल मुकदमे से उपजा है, जिसमें हिंदू पक्ष ने दावा किया है कि यह मस्जिद 16वीं शताब्दी में एक हिंदू मंदिर को ध्वस्त करके बनाई गई थी। इसी आधार पर उन्होंने मस्जिद में पूजा-पाठ का अधिकार मांगा और इसके सर्वे की मांग की थी। निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) ने इस याचिका पर 19 नवंबर 2024 को एकतरफा आदेश देते हुए सर्वे के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त कर दिया था।

हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

ट्रायल कोर्ट के आदेश को मस्जिद समिति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन हाईकोर्ट ने 19 मई 2025 को अपने फैसले में निचली अदालत के आदेश को सही ठहराया। हाईकोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में यह नहीं कहा जा सकता कि यह मुकदमा पूजा स्थल अधिनियम, 1991 के तहत प्रतिबंधित है। इसी फैसले के खिलाफ मस्जिद समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ यह मामला कई महीनों से लंबित था।

अदालत में किस पक्ष ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी और निजाम पाशा ने रखा। वहीं, हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता हरि शंकर जैन पेश हुए। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) के.एम. नटराज ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार इस विवाद के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहती क्योंकि मूल वाद अभी निचली अदालत में है। उन्होंने कहा कि राज्य का कर्तव्य दोनों पक्षों के धार्मिक हितों की रक्षा करना है। हालांकि, उन्होंने पूजा स्थल अधिनियम, 1991 की धाराओं 2 और 3 का जिक्र करते हुए इसकी व्याख्या पर जोर दिया। सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अब अदालत इस मामले पर अपना अंतिम निर्णय सुनाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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