शनिवार, 7 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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राजस्थान: किसी भी निर्माण को ढहाने से पहले सुनवाई का मौका देना ज़रूरी - हाईकोर्ट का अहम आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्माण, जिसमें मस्जिदें भी शामिल हैं, को ढहाने की कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को सुनवाई का पूरा मौका देना अनिवार्य है…

राजस्थान: किसी भी निर्माण को ढहाने से पहले सुनवाई का मौका देना ज़रूरी - हाईकोर्ट का अहम आदेश
(फोटो: IANS)

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी निर्माण, जिसमें मस्जिदें भी शामिल हैं, को ढहाने की कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को सुनवाई का पूरा मौका देना अनिवार्य है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जोधपुर खंडपीठ ने कहा कि कोई भी कदम उठाने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। इस पर राज्य सरकार ने भी अदालत को भरोसा दिलाया है कि जब तक कारण बताओ नोटिस पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक ध्वस्तीकरण की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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यह आदेश जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने 6 नवंबर को 'गफूर बनाम राजस्थान राज्य' मामले की सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि प्रशासन कारण बताओ नोटिस का जवाब लिए बिना ही बुलडोजर कार्रवाई कर रहा है, जो कि नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

मामले की पृष्ठभूमि और कानूनी प्रक्रिया

यह मामला राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में मस्जिदों और दरगाहों के खिलाफ हुई कार्रवाई से जुड़ा है। जमीयत उलमा-ए-राजस्थान के मुताबिक, यह कार्रवाई 18 जून 2026 को शुरू हुई थी, जिसमें 14 मस्जिदों और मजारों को ध्वस्त कर दिया गया था। आरोप था कि इस दौरान प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय नहीं दिया गया।

इसके बाद जमीयत ने कानूनी लड़ाई शुरू की। राजस्थान हाईकोर्ट में 40 से ज़्यादा याचिकाएं डाली गईं, जो 13 जुलाई 2026 को खारिज हो गईं। फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की और 15 दिनों का अंतरिम स्थगन आदेश मिला। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ही ये अपीलें दोबारा राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ में दाखिल की गईं।

अदालत के प्रमुख निर्देश

हाईकोर्ट ने अपीलकर्ताओं को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि जवाब मिलने के बाद सक्षम अधिकारी प्रभावित पक्ष को सुनवाई का उचित अवसर देंगे और सभी दस्तावेजों पर विचार करने के बाद ही कानून के मुताबिक कारण सहित लिखित आदेश पारित करेंगे। 'गफूर बनाम राजस्थान राज्य' मामले में दिए गए इस आदेश के आधार पर खंडपीठ ने चार अन्य अपीलों का भी निपटारा किया। इनमें बाड़मेर की मस्जिद आदर्श नगरी, मनोहर मस्जिद और अन्य व्यक्तिगत अपीलें शामिल थीं।

जमीयत उलमा-ए-हिंद की भूमिका

इस पूरे मामले में जमीयत उलमा-ए-हिंद प्रभावित लोगों को कानूनी सहायता मुहैया करा रही है। संगठन के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर अधिवक्ताओं की एक टीम ने अदालत में पैरवी की। इससे पहले, जमीयत के कई प्रतिनिधिमंडलों ने प्रभावित इलाकों का दौरा भी किया था। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जमीयत ने न्याय मिलने की उम्मीद जताते हुए कहा है कि उनकी संवैधानिक लड़ाई जारी रहेगी। साथ ही, उन्होंने क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की है।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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