मस्जिदों की सुरक्षा के लिए AIMPLB की नई पहल, जामिया में छात्र संघ चुनाव का भी किया समर्थन
देश के कई हिस्सों में मस्जिदों पर कब्जे जैसी घटनाओं को देखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक पहल करने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी…
देश के कई हिस्सों में मस्जिदों पर कब्जे जैसी घटनाओं को देखते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक पहल करने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इस पहल में मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ अन्य समुदायों के लोगों को भी शामिल किया जाएगा। बोर्ड का मानना है कि पूजा-स्थलों से सभी का भावनात्मक जुड़ाव होता है और उन्हें नुकसान पहुंचाना एक संवेदनशील मुद्दा है।
बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि बोर्ड की 51 सदस्यीय निगरानी समिति की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई और कुछ ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए बताया कि वहाँ कई मस्जिदों पर कब्जा कर लिया गया था, जिन्हें बाद में मुक्त कराया गया। इलियास ने कहा, "दुनिया में इस तरह की घटनाएं होती रहती हैं। कभी मस्जिदों को गिरा दिया जाता है लेकिन मुसलमानों में उन्हें दोबारा बनाने और फिर से आबाद करने का जज्बा बना रहता है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं को रोका जाना चाहिए।
जामिया छात्र संघ चुनाव का समर्थन
मस्जिदों की सुरक्षा के अलावा, सैयद कासिम रसूल इलियास ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव की मांग कर रहे छात्रों का भी समर्थन किया। उन्होंने चुनाव कराने में विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये की आलोचना करते हुए इसे गलत बताया।
इलियास के अनुसार, "छात्र संघ छात्रों की बुनियादी जरूरत है और उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने में इसकी अहम भूमिका होती है।" उन्होंने सवाल उठाया कि जब दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में चुनाव हो सकते हैं, तो जामिया में क्यों नहीं? उन्होंने कहा, "छात्र संघ चुनाव पर पाबंदियां लगाना और चुनाव की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करना गलत है।"
प्रवक्ता ने प्रशासन के उस कथित रुख पर भी चिंता जताई, जिसमें कहा गया है कि संविधान तैयार होने के 15 दिन बाद चुनाव होंगे। उन्होंने कहा कि जब संविधान तैयार होने की कोई समय-सीमा ही तय नहीं है, तो चुनाव की तारीख भी अनिश्चित है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर देरी जारी रही तो इस शैक्षणिक वर्ष में मतदान नहीं हो पाएगा।
इनपुट: IANS



