शनिवार, 7 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

महाराष्ट्र: एनसीपी के दोनों गुटों के विलय पर फिर अटकलें तेज़, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा - फ़ैसले के लिए स्वतंत्र हैं, पर एनडीए को भरोसे में लें

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़ों के एक होने की अटकलों का बाज़ार एक बार फिर गर्म हो गया है। इस सियासी हलचल पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि एनसीपी के…

महाराष्ट्र: एनसीपी के दोनों गुटों के विलय पर फिर अटकलें तेज़, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा - फ़ैसले के लिए स्वतंत्र हैं, पर एनडीए को भरोसे में लें
(फोटो: IANS)

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़ों के एक होने की अटकलों का बाज़ार एक बार फिर गर्म हो गया है। इस सियासी हलचल पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को कहा कि एनसीपी के दोनों गुट अपने फ़ैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन चूंकि वे एनडीए गठबंधन के प्रमुख सहयोगी हैं, इसलिए किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले उन्हें भरोसे में लेना होगा।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने कहा कि दोनों अलग-अलग पार्टियां हैं और उन्हें अपने आंतरिक मामलों पर खुद ही निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा, "उनकी पार्टी में शरद पवार साहब जैसे वरिष्ठ नेता हैं, साथ ही सुनेत्रा पवार, प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और पार्थ पवार भी हैं। इसलिए, मुझे नहीं लगता कि हमारी तरफ से उनकी ओर से कोई टिप्पणी करना या फैसला लेना उचित होगा।"

विलय की अटकलों को कैसे मिली हवा?

यह पूरा मामला तब फिर से सुर्खियों में आया जब गुरुवार को एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने अस्पताल जाकर एनसीपी (शरद पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार से मुलाकात की। इसके बाद, सुनील तटकरे के एक चौंकाने वाले खुलासे ने इन अटकलों को और हवा दे दी।

तटकरे ने शुक्रवार को दावा किया कि अगर पार्टी के पूर्व प्रमुख अजित पवार आज जीवित होते तो दोनों गुटों का विलय 12 फरवरी को ही हो गया होता। उन्होंने कहा, "जब अजित दादा जीवित थे, तब विलय को लेकर निश्चित रूप से बातचीत हुई थी। उन्होंने यह भी रूपरेखा तैयार की थी कि विलय कैसे होगा।" तटकरे ने बताया कि 28 जनवरी को एक हादसे में अजित पवार के दुखद निधन के कारण यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

एनसीपी (एसपी) गुट की प्रतिक्रिया

वहीं, एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने इन दावों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे जैसे वरिष्ठ नेताओं से सवाल किया कि वे अब विलय की बात क्यों कर रहे हैं, जबकि अजित पवार के निधन के तुरंत बाद उन्होंने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार कर दिया था।

रोहित पवार ने कहा, "वे अब ऐसा केवल राजनीतिक दबाव और अपनी पार्टी के भीतर की आंतरिक मुश्किलों के कारण कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी माना कि जब अजित पवार जीवित थे, तब विलय पर बातचीत हुई थी, लेकिन इसके पीछे मुख्य कारण व्यक्तिगत और पारिवारिक भावनाएं थीं। उनके अनुसार, अजित पवार चाहते थे कि इस उम्र में शरद पवार और पूरा पवार परिवार एकजुट रहे। रोहित पवार ने विलय की बातचीत को फिर से शुरू करने में दिखाई जा रही अचानक उत्सुकता पर हैरानी जताते हुए इसके पीछे राजनीतिक अवसरवाद या आंतरिक मतभेद होने का इशारा किया।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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