शनिवार, 7 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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मेकेदातु बांध परियोजना: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी को पत्र लिख जताई आपत्ति, किसानों की आजीविका पर ख़तरे की चेतावनी

कावेरी नदी पर कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस परियोजना को किसी…

मेकेदातु बांध परियोजना: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी को पत्र लिख जताई आपत्ति, किसानों की आजीविका पर ख़तरे की चेतावनी
(फोटो: IANS)

कावेरी नदी पर कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस परियोजना को किसी भी तरह की वैधानिक या प्रशासनिक मंजूरी न देने का आग्रह किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 6 नवंबर को लिखे इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक कावेरी बेसिन के सभी राज्यों की सहमति नहीं मिल जाती, तब तक केंद्र सरकार को आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

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मुख्यमंत्री विजय ने चेतावनी दी है कि इस परियोजना के एकतरफा निर्माण से तमिलनाडु के किसानों की आजीविका पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि कावेरी नदी राज्य के लिए सिंचाई और पेयजल का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिस पर विशेषकर डेल्टा जिलों के हजारों किसान परिवार निर्भर हैं। उनका मानना है कि मेकेदातु बांध बनने से नदी के निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता प्रभावित होगी, जिसका सीधा असर कृषि गतिविधियों और किसानों की आर्थिक सुरक्षा पर पड़ेगा।

केंद्र के दौरे पर उठाए सवाल

यह पत्र केंद्र सरकार के अधिकारियों द्वारा हाल ही में प्रस्तावित बांध स्थल का निरीक्षण करने के बाद लिखा गया है, जहाँ उन्होंने परियोजना की व्यवहार्यता का जायजा लिया था। मुख्यमंत्री ने इस दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब बेसिन के राज्यों के बीच परियोजना को लेकर विवाद बना हुआ है, तो ऐसे में स्थल निरीक्षण का फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने कहा कि संबंधित राज्यों की सहमति के बिना परियोजना को मंजूरी की दिशा में उठाया गया कोई भी कदम पहले से तय जल-बंटवारे की व्यवस्था और संघीय सिद्धांतों को कमजोर करेगा।

तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा की अपील

मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि केंद्र का कोई भी मंत्रालय, विभाग या वैधानिक प्राधिकरण कर्नाटक सरकार की इस परियोजना को तमिलनाडु की आपत्तियों पर विचार किए बिना या अन्य राज्यों की सहमति प्राप्त किए बिना मंजूरी न दे। उन्होंने अंतरराज्यीय नदी विवादों में केंद्र सरकार से निष्पक्ष और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाने की जिम्मेदारी याद दिलाई। यह परियोजना लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण रही है, क्योंकि तमिलनाडु ऐसी किसी भी योजना का विरोध करता है जिससे कावेरी के पानी में उसके हिस्से पर असर पड़ सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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