धोलेरा स्मार्ट सिटी में निवेश का झांसा: 'नेक्सा एवरग्रीन' धोखाधड़ी मामले में ED ने सुभाष बिजारणिया को दबोचा
निवेशकों से धोलेरा स्मार्ट सिटी में जमीन दिलाने के नाम पर 2,676 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले 'नेक्सा एवरग्रीन' ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
निवेशकों से धोलेरा स्मार्ट सिटी में जमीन दिलाने के नाम पर 2,676 करोड़ रुपए की ठगी करने वाले 'नेक्सा एवरग्रीन' ग्रुप पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में जयपुर ईडी ने मुख्य आरोपियों में से एक सुभाष चंद्र बिजारणिया (उर्फ सुभाष चंद्र बिजनोरिया) को गिरफ्तार कर लिया है।
सोमवार को हुई इस गिरफ्तारी के बाद आरोपी सुभाष को जयपुर की विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 13 अगस्त तक के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है। एजेंसी के अनुसार, यह कार्रवाई राजस्थान पुलिस द्वारा नेक्सा एवरग्रीन ग्रुप के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की गई जांच का हिस्सा है।
सालाना 150% रिटर्न का लालच
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी रणवीर बिजारणिया और सुभाष बिजारणिया ने अपने साथियों के साथ मिलकर एक बड़ी पोंजी स्कीम चलाई। उन्होंने निवेशकों को गुजरात की धोलेरा स्मार्ट सिटी में प्लॉटिंग और जमीन विकास परियोजनाओं में निवेश का झांसा दिया। निवेशकों को 60 हफ्तों तक हर हफ्ते 3% के निश्चित रिटर्न या फिर प्लॉट देने का वादा किया गया था। इसके अलावा, मल्टी-लेवल रेफरल स्कीम के तहत नए निवेशक जोड़ने पर लैपटॉप, मोटरसाइकिल और कार जैसे इनामों का भी लालच दिया जाता था।
कैसे काम करता था धोखाधड़ी का नेटवर्क
ईडी ने अपनी जांच में पाया कि सुभाष बिजारणिया इस धोखाधड़ी का मुख्य संचालक था और रणवीर बिजारणिया के साथ मिलकर पूरी गतिविधि को नियंत्रित करता था। उसने अवैध कमाई को खपाने और छिपाने के लिए अपने सहयोगियों और निवेशकों के नाम पर कंपनियों, एलएलपी और फर्मों का एक जटिल जाल बिछा रखा था। इन संस्थाओं के बैंक खातों का इस्तेमाल निवेशकों से पैसा जमा करने, पुराने निवेशकों को रिटर्न देकर पोंजी स्कीम चलाने और फिर उस पैसे से अचल संपत्ति खरीदने में किया जाता था, ताकि पैसे के असली स्रोत का पता न चल सके।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
इससे पहले, जून 2025 में भी ईडी ने इस मामले में जयपुर, सीकर, झुंझुनू और अहमदाबाद में 25 ठिकानों पर तलाशी ली थी। उस कार्रवाई में 2.04 करोड़ रुपए नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। साथ ही, नेक्सा ग्रुप से जुड़े विभिन्न बैंक और क्रिप्टो खातों में मौजूद करीब 15 करोड़ रुपए की रकम को भी फ्रीज कर दिया गया था। ईडी ने बताया है कि मामले में आगे की जांच जारी है।
इनपुट: IANS



