राजस्थान हाईकोर्ट की अपनी इमारत ही असुरक्षित? 21 मीटर ऊंचे गुंबद पर मंडराया ढहने का खतरा
राजस्थान उच्च न्यायालय के जोधपुर स्थित भव्य भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उभर आई हैं, जिसके बाद अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। विशेष रूप से, इमारत के करीब 21 मीटर ऊंचे…
राजस्थान उच्च न्यायालय के जोधपुर स्थित भव्य भवन की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उभर आई हैं, जिसके बाद अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। विशेष रूप से, इमारत के करीब 21 मीटर ऊंचे केंद्रीय गुंबद के अचानक ढहने की आशंका जताई गई है, जिसके चलते इसे जनहित याचिका के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने इस बात पर जोर दिया है कि न्यायाधीशों, वकीलों, कर्मचारियों और आम जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कदम विशेषज्ञों की उन रिपोर्टों के बाद उठाया गया है, जिनमें इमारत में गंभीर खामियों और कंक्रीट गिरने के संभावित खतरे को उजागर किया गया था।
लगातार हो रही हैं प्लास्टर गिरने की घटनाएं
यह भवन दिसंबर 2019 में उच्च न्यायालय को सौंपा गया था, जबकि इसका ढांचा 2013 के अंत तक पूरा हो गया था। हालांकि, बीते कुछ सालों में छत से प्लास्टर और फॉल्स सीलिंग गिरने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 से कोर्टरूम नंबर 2, 9, 16 और चैंबर 16 में ऐसी घटनाएं हुईं। 20 फरवरी 2023 को कोर्टरूम 14 में और 29 अप्रैल 2023 को गुंबद का एक हिस्सा भी गिर गया था। इसके अलावा सिविल विविध अपील अनुभाग, बिल अनुभाग और लिफ्ट के पास भी प्लास्टर व फॉल्स सीलिंग गिरने की घटनाएं दर्ज की गईं।
विशेषज्ञों की जांच में क्या मिला?
आईआईटी जोधपुर और आईआईटी बॉम्बे जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा किए गए ऑडिट में कई गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई हैं। जांच में पता चला कि कंक्रीट और स्टील की छड़ों में नमी के कारण जंग लग रहा है, जिससे ढांचा कमजोर हो रहा है। आईआईटी बॉम्बे की हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि जांच किए गए लगभग 40 प्रतिशत हिस्सों में कंक्रीट के टूटने का खतरा है। रिपोर्ट के अनुसार, नमी और रिसाव बढ़ने से यह प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे हिस्से अचानक ढह सकते हैं। पानी के नमूनों में क्लोराइड का स्तर भी तय सीमा से अधिक पाया गया।
मरम्मत पर आएगा ₹57 करोड़ से ज्यादा का खर्च
इन खामियों को देखते हुए राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम (RSRDC) ने मरम्मत कार्यों के लिए लगभग 57.65 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया है। इसमें बीम, कॉलम और स्लैब जैसे संरचनात्मक तत्वों की मरम्मत के साथ-साथ सीलन और अन्य तकनीकी गड़बड़ियों को ठीक करना शामिल है। एहतियात के तौर पर, अदालत के निर्देश पर केंद्रीय गुंबद के नीचे के हिस्से को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है।
इनपुट: IANS



