नागपंचमी और स्वतंत्रता दिवस बनेंगे एक साथ, जानिए क्या होगा पूजा का शुभ मुहूर्त

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सावन के महीने में आने वाली नागपंचमी उत्तर भारत के बड़े त्योहारों में से एक है. नागपंचमी शिव भक्तो द्वारा बड़े धूम धाम से मनाई जाती है. इस दिन शिवजी के गल हार नाग देवता की पूजा करने का विधान है. इस दिन नाग देवता के 12 स्वरूपों की पूजा की जाती है. ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा करने और रुद्राभिषेक करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं.

कब और क्यों मनाई जाती है नाग पंचमी ?

हिन्दू धर्मानुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई जाती है. स्कन्द पुराण के अनुसार इस दिन नागों की पूजा करने से सारी मनोकामनाए पूर्ण होती हैं.

कैसे करे सही तरीके से पूजा

इस दिन अपने दरवाजे के दोनों ओर गोबर से सर्पों की आकृति बनानी चाहिए और धूप, पुष्प आदि से इसकी पूजा करनी चाहिए. इसके बाद इन्द्राणी देवी की पूजा करनी चाहिए. दही, दूध, अक्षत, जलम पुष्प, नेवैद्य आदि से उनकी आराधना करनी चाहिए. इसके बाद भक्तिभाव से ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए. इस दिन पहले मीठा भोजन फिर अपनी रुचि अनुसार भोजन करना चाहिए. इस दिन द्रव्य दान करने वाले पुरुष पर कुबेर जी की दयादृष्टि बनती है. मान्यता है कि अगर किसी जातक के घर में किसी सदस्य की मृत्यु सांप के काटने से हुई हो तो उसे बारह महीने तक पंचमी का व्रत करना चाहिए. इस व्रत के फल से जातक के कुल में कभी भी सांप का भय नहीं होगा.

पूजा का शुभ मुहूर्त 15 अगस्त यानि कल सुबह 3 बज कर 27 मिनट पर शुरू हों कर 16 अगस्त को दिन में 1 बज कर 51 मिनट पर ख़तम हो रही है. कहा जाता है की जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष है, उनके लिए इस दिन शिव पूजन करना जरूरी है. वहीं नाग पूजन से कालसर्प दोष से होने वाली हानि से बचा जा सकता है.

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