फर्जी सरकारी टेंडर रैकेट: ED ने त्रिपुरा, बंगाल और महाराष्ट्र में की बड़ी छापेमारी
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े फर्जी सरकारी टेंडर रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कार्रवाई त्रिपुरा, पश्चिम…
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बड़े फर्जी सरकारी टेंडर रैकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तीन राज्यों में एक साथ तलाशी अभियान चलाया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह कार्रवाई त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में 13 अलग-अलग ठिकानों पर की गई। आरोप है कि इस घोटाले में एक निलंबित IAS अधिकारी समेत कई लोग शामिल हैं, जिन्होंने एक फर्जी सरकारी संस्था बनाकर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की।
यह पूरा मामला नागपुर की एक फर्म 'एसके सेल्स कॉर्पोरेशन' की शिकायत के बाद सामने आया था। फर्म ने आरोप लगाया था कि उनसे लगभग 14.55 करोड़ रुपये की 'अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट' (EMD) धोखे से जमा करवा ली गई। यह रकम सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच त्रिपुरा सरकार के मिड-डे मील और बिजली क्षेत्र से जुड़े कथित टेंडरों के नाम पर ली गई थी, जबकि असल में ऐसे कोई टेंडर कभी जारी ही नहीं हुए थे।
कैसे दिया गया धोखाधड़ी को अंजाम?
ED की जांच में पता चला है कि त्रिपुरा कैडर के निलंबित IAS अधिकारी अभिषेक चंद्र ने खुद को टेंडर प्रक्रिया का नियंत्रण अधिकारी बताकर इस घोटाले को अंजाम दिया। उन्होंने शिकायतकर्ता को उत्पल कुमार चौधरी से मिलवाया, जिसे भुगतान प्रक्रिया देखने की जिम्मेदारी दी गई थी।
आरोपियों ने 'उच्च शिक्षा निदेशालय' नाम से एक फर्जी संस्था बनाई, जो असली सरकारी विभाग से मिलती-जुलती थी। EMD का भुगतान इसी संस्था के नाम पर डिमांड ड्राफ्ट के जरिए लिया गया, जो असल में उत्पल कुमार चौधरी की एक निजी फर्म थी। इस काम के लिए फर्जी टेंडर नोटिस और वर्क ऑर्डर का भी इस्तेमाल किया गया।
पैसों का जाल और लग्जरी खर्च
जांच एजेंसी के मुताबिक, फर्जी संस्था के खातों में जमा हुई रकम को कुछ ही दिनों, और कई बार तो 24 घंटों के भीतर, कागजी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए ठिकाने लगा दिया गया। इनमें से कई कंपनियां उत्पल कुमार चौधरी के घरेलू कर्मचारियों और सहयोगियों के नाम पर पंजीकृत थीं।
आरोप है कि इस अवैध कमाई का इस्तेमाल कई तरह से किया गया:
- मुंबई के शिवाजी पार्क में अभिषेक चंद्रा के परिवार के नाम पर रिहायशी संपत्ति खरीदी गई।
- एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदे गए।
- पैसों का इस्तेमाल विदेश यात्राओं और लग्जरी सामान खरीदने में भी हुआ।
- कोलकाता स्थित एक हवाला नेटवर्क के जरिए भी पैसों का लेन-देन किया गया।
यह मामला पश्चिम त्रिपुरा के कैपिटल कॉम्प्लेक्स पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR पर आधारित है, जिसमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। इन्हीं अपराधों के आधार पर ED ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की है। ईडी पहले से ही उत्पल कुमार चौधरी और अन्य के खिलाफ इसी तरह के अन्य मामलों की जांच कर रही है, जिनमें कुल 44 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी का आरोप है।
इनपुट: IANS



