महाराष्ट्र: आदिवासी आवासीय स्कूलों में दो साल में 584 मौतें, 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
महाराष्ट्र के आदिवासी आवासीय स्कूलों में पिछले दो सालों में 584 छात्रों की मौत की ख़बर ने राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। सरकारी आंकड़ों के सामने आने के बाद, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने इन मौतों पर…
महाराष्ट्र के आदिवासी आवासीय स्कूलों में पिछले दो सालों में 584 छात्रों की मौत की ख़बर ने राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है। सरकारी आंकड़ों के सामने आने के बाद, 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने इन मौतों पर जवाबदेही की मांग करते हुए 'आदिवासी स्कूल ठीक करो' नाम से एक अभियान शुरू किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके ने बुधवार को नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस अभियान की औपचारिक घोषणा की।
यह मुद्दा हाल ही में अगस्त में गढ़चिरौली के एक हॉस्टल में हुई घटना के बाद और गरमा गया है, जहाँ सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की जान चली गई थी। बताया गया कि उन्हें चारपाई न होने की वजह से ज़मीन पर सोना पड़ा और उस एक ही कमरे में 79 छात्राएं रह रही थीं। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी सरकार को नोटिस जारी किया है।
सरकार पर गंभीर सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आदिवासी छात्रों की लगातार हो रही मौतों पर सरकार को घेरा। उनके साथ राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे और संयुक्त सचिव अक्षय शिंदे भी मौजूद थे। दिपके ने सवाल उठाया, "जब कोई त्रासदी होती है तो सरकार बहुत कम मुआवजे या पशु-धन देकर इंसानी जान के नुकसान को नजरअंदाज करने की कोशिश करती है। मैं आज पूछता हूं कि अगर किसी मंत्री के परिवार को ऐसा ही नुकसान उठाना पड़ता तो क्या उन्हें दो लाख रुपए का चेक या एक बकरी मंजूर होती?"
उन्होंने कहा कि बालाघाट में 30 से ज़्यादा बच्चों की मौत भी इसी लापरवाही का नतीजा है, जहाँ बच्चे गंदा पानी पीने और फूड पॉइजनिंग जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारियों से मर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर योजनाओं की स्थिति
CJP ने कहा कि ये मौतें कोई अकेली घटनाएं नहीं हैं, बल्कि एक पैटर्न का हिस्सा हैं। पार्टी ने संसद की एक स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि बीस सालों में आश्रम-स्कूल योजना सिर्फ 14 राज्यों तक ही पहुँच पाई है। समिति ने स्कूलों में ज़रूरत से ज़्यादा भीड़ और खराब भोजन को एक राष्ट्रीय समस्या माना है। इसके अलावा, नई एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल (EMRS) योजना के तहत स्वीकृत 720 स्कूलों में से सिर्फ 477 ही चालू हैं, और हज़ारों शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
अभियान की मुख्य मांगें
पार्टी ने अभियान के तहत सरकार से कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें तीन महीने के भीतर देश के हर आदिवासी आवासीय स्कूल का स्वतंत्र ऑडिट कराना, रिपोर्ट को सार्वजनिक करना और पिछले दस सालों में हुई मौतों की राज्य-वार जानकारी देना शामिल है। इसके अलावा, स्वीकृत और चालू स्कूलों का एक पब्लिक डैशबोर्ड बनाने की भी मांग की गई है ताकि योजनाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
इनपुट: IANS



