झीरम घाटी हमला: TS सिंह देव का बड़ा दावा - 'तीसरे दिन रास्ते में एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं था'
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर एक गंभीर दावा किया है। उन्होंने कहा है कि घटना वाले दिन कांग्रेस नेताओं के काफिले के रास्ते पर…
छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले को लेकर एक गंभीर दावा किया है। उन्होंने कहा है कि घटना वाले दिन कांग्रेस नेताओं के काफिले के रास्ते पर एक भी सुरक्षाकर्मी मौजूद नहीं था, जबकि कार्यक्रम के पहले दो दिन सुरक्षा चाक-चौबंद थी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सिंह देव का यह बयान तब आया है जब जगदलपुर की एक विशेष NIA अदालत ने इस मामले में 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है।
25 मई 2013 को हुए इस भीषण नक्सली हमले में कांग्रेस के काफिले को निशाना बनाया गया था, जिसमें 29 लोगों की जान चली गई थी। अंबिकापुर में पत्रकारों से बात करते हुए सिंह देव ने उस समय के घटनाक्रम को याद किया, जब वे कांग्रेस के कार्यक्रम प्रभारी थे।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल
सिंह देव ने बताया कि कार्यक्रम से पहले उन्होंने डीजीपी कार्यालय से लेकर आईजी स्तर तक के सभी संबंधित अधिकारियों को लिखित सूचना देकर सुरक्षा की मांग की थी। उन्होंने कहा, "कार्यक्रम की जानकारी प्रशासन को दी गई थी और उसके अनुसार पहले दो दिनों तक पूरी सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।"
उनके मुताबिक, बीजापुर और जगदलपुर में हुए शुरुआती कार्यक्रमों में सुरक्षा में कोई कमी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने दावा किया कि तीसरे दिन हालात बिल्कुल अलग थे। उन्होंने कहा, "जब मैं निर्धारित समय से करीब आधा घंटा पहले निकला... तब मैंने देखा कि सड़क पर एक भी पुलिसकर्मी नहीं था, न कोई सुरक्षा बल तैनात था और न ही रास्ते में कोई रोक-टोक थी।"
'अचानक क्यों गायब हो गई सुरक्षा?'
टीएस सिंह देव ने बताया कि सुकमा तक की उनकी यात्रा सामान्य रही, लेकिन वकावनघाटी में कोई अधिकारी तैनात नहीं था। सुकमा में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब वे अगली सभा के लिए निकले, तब भी रास्ते में कोई सुरक्षाकर्मी नहीं दिखा।
उन्होंने सवाल उठाया, "यह कैसे हुआ? वही व्यवस्था, जिसने पहले दो दिनों तक हमें पूरी सुरक्षा दी और सुरक्षा का अहसास कराया, तीसरे दिन अचानक क्यों नदारद हो गई? और फिर यह दुखद घटना घट गई।" उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले के कई पहलुओं की जांच होनी अभी बाकी है। दोषियों को मिली फांसी की सज़ा पर उन्होंने कहा, "फांसी की सजा से बड़ी कोई सजा नहीं होती। कौन-कौन से नक्सली इस हमले में शामिल थे और कौन नहीं थे, यह अलग विषय है। यह जांच का मामला है।"
इनपुट: IANS



