विदेशी फंडिंग: अमेरिकी संस्था TTI पर CBI का शिकंजा, 92 करोड़ की हेराफेरी के आरोप में 7 पर FIR
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विदेशी फंडिंग नियमों के कथित उल्लंघन के एक बड़े मामले में अमेरिका स्थित संस्था 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) और सात अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। समाचार एजेंसी IANS…
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विदेशी फंडिंग नियमों के कथित उल्लंघन के एक बड़े मामले में अमेरिका स्थित संस्था 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) और सात अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी पर विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) का उल्लंघन करने, आपराधिक साजिश रचने, धोखाधड़ी, जालसाजी और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप हैं।
यह कार्रवाई गृह मंत्रालय की सिफारिश पर की गई, जो प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच रिपोर्ट पर आधारित थी। CBI की दिल्ली स्थित आर्थिक अपराध शाखा ने यह मामला 27 अगस्त, 2026 को दर्ज किया। एफआईआर में अमेरिका की संस्था TTI के अलावा जोनाथन एस राजन, मिकाह मार्क, अजीत वर्गीज मथाई, वर्गीज चाको, बाबलू कुर्मी और सुप्रीम जॉय को आरोपी बनाया गया है।
फंडिंग का तरीका और बरामदगी
जांच एजेंसियों का आरोप है कि आरोपियों ने एक आपराधिक साजिश के तहत अमेरिका के ट्रुइस्ट बैंक द्वारा जारी विदेशी डेबिट कार्डों का इस्तेमाल किया। इन कार्डों के जरिए भारत के अलग-अलग एटीएम से बड़ी मात्रा में विदेशी पैसा निकाला गया। ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, 18 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु हवाई अड्डे पर आरोपी मिकाह मार्क के पास से ऐसे 24 विदेशी डेबिट कार्ड बरामद हुए थे, जिन पर 'संतोष कुमार' नाम दर्ज था। एजेंसियों का मानना है कि असली पहचान छिपाने और KYC नियमों से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया।
आरोप और लेन-देन का दायरा
आरोपों के मुताबिक, नवंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच ही करीब 92.55 करोड़ रुपये (लगभग 99.95 लाख अमेरिकी डॉलर) की रकम FCRA प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए इस्तेमाल की गई। इसके अलावा, जनवरी 2024 से मार्च 2026 के बीच कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों में विदेशी डेबिट कार्डों से लगभग 44 करोड़ रुपये निकाले जाने का भी आरोप है। ईडी की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जोनाथन राजन भारत में TTI की गतिविधियों के प्रभारी थे, जबकि अजीत वर्गीज मथाई वित्तीय कामकाज देख रहे थे। इस पैसे का इस्तेमाल प्रशिक्षण कार्यक्रमों और धार्मिक प्रचार जैसे आयोजनों के लिए किए जाने का आरोप है।
सबूत मिटाने के भी आरोप
ED ने अपनी रिपोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को नष्ट करने के प्रयास का भी जिक्र किया है। 18 अप्रैल 2026 को मिकाह मार्क के ठिकाने की तलाशी में मिले एक लैपटॉप से वित्तीय डेटा का एक्सेस उसी दिन बंद कर दिया गया और सारा डेटा मिटा दिया गया। अगले ही दिन, दूसरे प्लेटफॉर्म पर मौजूद भारतीय डेटा तक पहुंच भी रोक दी गई। इसी आधार पर मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं।
इनपुट: IANS



