गुरूवार, 20 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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जेपीएससी नियुक्तियां: सरकारी आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, चयनित अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत

झारखंड में जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के हालिया फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति…

जेपीएससी नियुक्तियां: सरकारी आदेश पर हाईकोर्ट की रोक, चयनित अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत
(फोटो: IANS)

झारखंड में जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के हालिया फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने अगले आदेश तक रोक लगा दी है। गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने यह अंतरिम आदेश जारी किया, जिससे उन सैकड़ों सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है जिनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह रोक 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा से संबंधित नियुक्तियों पर प्रभावी होगी। अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और जेपीएससी दोनों से जवाब तलब किया है। यह सुनवाई उन चयनित अभ्यर्थियों द्वारा दायर याचिकाओं पर हुई, जिन्होंने सरकार के 18 अगस्त के फैसले को चुनौती दी थी।

क्यों अदालत पहुँचे थे अभ्यर्थी?

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने दलील दी कि अगर भर्ती प्रक्रिया में कोई अनियमितता हुई थी, तो उसकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को बिना व्यक्तिगत जांच या सुनवाई के रद्द करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

याचिकाओं में अभ्यर्थियों ने अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों का भी हवाला दिया। उदाहरण के लिए, सोनम कुमारी नामक एक अभ्यर्थी ने बताया कि उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने इसके लिए अपनी दूसरी नौकरी भी छोड़ दी थी। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद अचानक नियुक्ति रद्द करने के सरकारी आदेश से उनका भविष्य अधर में लटक गया था।

सरकार ने क्यों रद्द की थीं नियुक्तियां?

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर चल रही सीआईडी जांच के तथ्यों के आधार पर 18 अगस्त की देर रात यह बड़ा फैसला लिया था। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने अधिसूचना जारी कर कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 अन्य को जांच के दायरे में रखने की घोषणा की थी। सरकार के इस कदम के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों ने आंदोलन भी शुरू कर दिया था। अब हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले पर सबकी नजरें टिकी हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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