आंध्र प्रदेश: YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने DSC और ग्रुप-I परीक्षाओं की CBI जांच की चुनौती दी
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के सामने एक बड़ी चुनौती रखी है। उन्होंने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मांग की कि…
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP अध्यक्ष वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी ने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के सामने एक बड़ी चुनौती रखी है। उन्होंने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मांग की कि DSC 2025 और APPSC ग्रुप-I परीक्षाओं में हुए कथित घोटालों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जगन मोहन रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी अपने शासनकाल में हुई 'ग्रुप-आई' परीक्षा की किसी भी जांच के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने सवाल किया कि क्या टीडीपी के नेतृत्व वाली मौजूदा गठबंधन सरकार भी DSC मामले की इसी तरह की निष्पक्ष जांच कराने का साहस रखती है।
परीक्षाओं पर आरोप-प्रत्यारोप
जगन ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में हुई APPSC 2018 की परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी और अदालती निर्देशों के अनुसार आयोजित की गई थीं, जिसमें किसी भी गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं थी। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि DSC परीक्षा की प्रक्रिया शुरू से लेकर अंत तक, यानी प्रश्न पत्र तैयार करने से लेकर भर्ती तक, हर कदम पर संदिग्ध रही है।
YSRCP प्रमुख ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनके बेटे व शिक्षा मंत्री नारा लोकेश, दोनों ने विधानसभा में इन अनियमितताओं को स्वीकार किया था, लेकिन इस मुद्दे को विधान परिषद में उठने नहीं दिया। गौरतलब है कि YSRCP नेता प्रतिपक्ष का दर्जा न मिलने के विरोध में विधानसभा का बहिष्कार कर रही है, लेकिन परिषद की कार्यवाही में हिस्सा ले रही है।
DSC भर्ती में कथित घोटाले का ब्यौरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने DSC परीक्षा में हुई कथित धांधली का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र बनाने और परीक्षा आयोजित करने, दोनों का काम एक ही संस्था को दिया गया, जिससे भ्रष्टाचार और पेपर लीक की आशंकाएं पैदा हुईं। उन्होंने नवीन नाम के एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी का उदाहरण दिया, जिसे प्रश्नपत्र तक पहुंच मिली और उसने मेरिट लिस्ट में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया। मामला सामने आने पर उसका नाम दूसरी सूची से हटा दिया गया, जिसके खिलाफ उसने अदालत में याचिका भी दायर की।
खेल कोटा में मनमानी का आरोप
जगन मोहन रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि खेल कोटे के तहत भर्ती में भी मनमानी की गई। उन्होंने कहा, "सरकार ने दो सरकारी आदेश जारी कर नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को डीएससी परीक्षा देने से छूट दी थी। पसंदीदा लोगों को भर्ती करने के बाद, पहले के आदेशों को रद्द करते हुए दो और सरकारी आदेश जारी करके दरवाजे बंद कर दिए गए।"
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में 372 लोगों को नौकरियां दी गईं। सरकार ने इसका बचाव यह कहकर किया कि जब पीवी सिंधु को नौकरी दी जा सकती है, तो खेल कोटे में दूसरों पर भी यही नियम लागू होते हैं। जगन ने दावा किया कि इन 372 लोगों में से किसी ने भी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट नहीं खेले थे, जबकि राष्ट्रीय खेलों में तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाले को भी नौकरी नहीं मिली।
अंत में उन्होंने कहा कि नौकरियों की खरीद-फरोख्त से जुड़े ऑडियो क्लिप वायरल होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। इन्हीं कारणों से उन्होंने DSC मामले की CBI जांच और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
इनपुट: IANS



