1984 सिख दंगे: उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का तिहाड़ जेल में निधन
1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी ठहराए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…
1984 के सिख विरोधी दंगों में दोषी ठहराए जाने के बाद आजीवन कारावास की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार को 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, उन्होंने दिल्ली की तिहाड़ जेल में अंतिम सांस ली, जहाँ वे पिछले सात वर्षों से बंद थे।
सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट और पालम कॉलोनी इलाके में पांच सिखों की हत्या और एक गुरुद्वारे में आगजनी के मामले में दोषी पाया गया था। इसी मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने 14 दिसंबर, 2018 को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कुमार ने इस फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी, लेकिन उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
कानूनी लड़ाई और अन्य मामले
उच्च न्यायालय का यह फैसला 2013 में आया था, जब उसने निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलट दिया था। इससे पहले राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जनकपुरी और विकासपुरी हिंसा से जुड़े एक मामले में बरी कर दिया था, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी।
मामले के दोबारा खुलने पर फरवरी 2015 में विशेष जांच दल (SIT) ने सज्जन कुमार व अन्य के खिलाफ दो FIR दर्ज की थीं। पहली FIR 1 नवंबर, 1984 को जनकपुरी में सरदार सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या से संबंधित थी, जबकि दूसरी FIR 2 नवंबर, 1984 को सरदार गुरचरण सिंह को जिंदा जलाने के आरोप में दर्ज की गई थी।
जमानत की कोशिशें और अंतिम बयान
जेल में रहते हुए सज्जन कुमार ने अपनी बीमार पत्नी से मिलने के लिए इसी साल अप्रैल में सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मांगी थी, जिसे अदालत ने नामंजूर कर दिया था। हालांकि, दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में उन्हें 27 अप्रैल, 2022 को जमानत मिल गई थी, लेकिन उम्रकैद की सजा के कारण वे जेल से बाहर नहीं आ सके।
इन मामलों में 7 जुलाई, 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट में बयान दर्ज कराते हुए सज्जन कुमार ने खुद को निर्दोष बताया था। उन्होंने कहा था कि वे दंगों में कभी शामिल नहीं थे, उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है और जांच एजेंसी ने निष्पक्ष जांच नहीं की।
इनपुट: IANS



