पटना PMCH में डॉक्टरों पर जानलेवा हमला, देर रात मरीज की मौत के बाद भड़के परिजन, एक डॉक्टर ICU में भर्ती
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच), में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार देर रात एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों…
बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच), में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार देर रात एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों द्वारा किए गए हमले में एक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आईसीयू में भर्ती कराना पड़ा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना के बाद आक्रोशित जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल कर दी थी, हालांकि बाद में प्रबंधन से बातचीत के बाद उन्होंने इसे वापस ले लिया।
घटना की शुरुआत बुधवार रात करीब 10 बजे हुई, जब एक गंभीर रूप से बीमार मरीज ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने बताया कि मरीज के परिजनों ने इलाज शुरू होने से पहले ही लिखित में उसकी नाजुक हालत की जानकारी होने की बात स्वीकार की थी।
चाय की दुकान पर रॉड से हमला
मरीज की मौत के कुछ घंटों बाद, परिजनों ने पहले एक डॉक्टर से हाथापाई की, जिन्हें सुरक्षा गार्ड ने बचाया। लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। पीएमसीएच जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जेडीए) के अध्यक्ष डॉ. सत्यम के मुताबिक, आरोपियों ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया और 10-15 बाहरी लोगों को बुलाकर दोबारा अस्पताल परिसर में घुस आए।
इसके बाद हमलावरों ने लाइब्रेरी के पास एक चाय की दुकान पर बैठे कुछ मेडिकल छात्रों और जूनियर डॉक्टरों पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया। डॉ. सत्यम ने बताया कि इस हमले में घायल हुए एक डॉक्टर की हालत गंभीर है और वह अपनी एक महत्वपूर्ण परीक्षा भी नहीं दे पाए।
सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने अस्पताल परिसर में डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। डॉक्टरों ने मांग की है कि हमलावरों के खिलाफ संस्थागत एफआईआर दर्ज की जाए और सुरक्षाकर्मियों को पर्याप्त अधिकार दिए जाएं ताकि वे ऐसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोक सकें।
फिलहाल, पीएमसीएच प्रबंधन के साथ हुई बातचीत के बाद जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए हैं। लेकिन उन्होंने साफ किया है कि अस्पताल में सुरक्षा का मुद्दा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बना हुआ है और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
इनपुट: IANS



