गुरूवार, 20 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश में तीन दशक बाद राष्ट्रपति पद के लिए मतदान, बीएनपी और 11-दलीय गठबंधन आमने-सामने

बांग्लादेश में तीन दशकों से भी अधिक समय के बाद पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए वास्तविक मतदान हो रहा है, जहाँ मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय…

बांग्लादेश में तीन दशक बाद राष्ट्रपति पद के लिए मतदान, बीएनपी और 11-दलीय गठबंधन आमने-सामने
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश में तीन दशकों से भी अधिक समय के बाद पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए वास्तविक मतदान हो रहा है, जहाँ मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन के बीच है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को संसद के सत्र कक्ष में मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। देश के 23वें राष्ट्रपति के चुनाव की यह प्रक्रिया मुख्य चुनाव आयुक्त और रिटर्निंग अधिकारी एएमएम नासिर उद्दीन की देखरेख में चल रही है।

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गुरुवार को मतदान शुरू होने पर प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी पार्टी बीएनपी के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर के साथ अपना वोट डाला। इस चुनाव में कुल 349 सांसद मतदान करने के पात्र हैं। आलमगीर का मुकाबला जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद से है।

चुनाव का गणित और राजनीतिक समीकरण

संसद में सत्तारूढ़ बीएनपी को स्पष्ट बहुमत हासिल है, जिससे चुनाव का नतीजा लगभग तय माना जा रहा है। 2026 के संसदीय चुनाव में बीएनपी ने 210 सीटें जीती थीं, जबकि 11-दलीय गठबंधन को 77 सीटों पर जीत मिली थी। इस संख्या बल के आधार पर बीएनपी उम्मीदवार की जीत की प्रबल संभावना है। चुनाव विशेषज्ञ बदिउल आलम मजूमदार के मुताबिक, "राष्ट्रपति चुनाव का नतीजा लगभग पहले से तय माना जा रहा है। सत्तारूढ़ पार्टी जिस व्यक्ति को समर्थन देगी, वही राष्ट्रपति बनेगा।"

हार के बावजूद विपक्ष मैदान में क्यों?

यह सवाल भी उठ रहा है कि निश्चित हार के बावजूद विपक्षी गठबंधन ने उम्मीदवार क्यों उतारा। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील एडवोकेट मंजिल मोर्शेद ने ढाका ट्रिब्यून से कहा, "विपक्ष को पता है कि वह चुनाव हार जाएगा। इसके बावजूद उम्मीदवार उतारना एक राजनीतिक रणनीति है।" उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह केवल एक औपचारिक भागीदारी हो सकती है, ताकि कोई उन पर चुनाव में हिस्सा न लेने का आरोप न लगा सके।

पृष्ठभूमि और संवैधानिक अनिवार्यता

यह चुनाव 24 जुलाई को राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद हो रहा है। इसके बाद से राष्ट्रीय संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति का पद खाली होने के 90 दिनों के भीतर चुनाव कराना अनिवार्य है। गौरतलब है कि 1991 के बाद से अब तक राष्ट्रपति आम तौर पर निर्विरोध चुने जाते रहे हैं। संसद में मतदान के जरिए आखिरी बार राष्ट्रपति का चुनाव 8 अक्टूबर 1991 को हुआ था।

इनपुट: IANS

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