झारखंड: छात्रों के भर्ती परीक्षा आंदोलन को रघुवर दास और हिमंता बिस्वा सरमा का समर्थन, सरकार पर साधा निशाना
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के दो बड़े नेताओं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और असम के…
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग लेता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के दो बड़े नेताओं, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा, ने मंगलवार को आंदोलनकारी छात्रों की मांगों को जायज ठहराते हुए हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जमशेदपुर में मीडिया से बातचीत में रघुवर दास ने कहा कि रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों की स्थिति देखकर उनका मन व्यथित है। उन्होंने आरोप लगाया कि धरना स्थल पर न तो पानी की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही छात्रों को टेंट लगाने की इजाजत दी गई है। अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र आंदोलन से करने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे छात्रों की पीड़ा को समझते हैं।
सरकार से सीधी बातचीत और CBI जांच की मांग
रघुवर दास ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक ई-मेल भेजा है। इसमें उन्होंने आग्रह किया है कि सरकार इस मामले को राजनीतिक दृष्टि से न देखे, बल्कि इसे छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा समझे। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों के साथ सीधे संवाद करने और उनकी मांग के अनुसार पूरे मामले की CBI जांच कराने की अपील की। दास ने चेतावनी दी कि अगर समय पर समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि तब 1.33 लाख नियुक्तियां बिना किसी विवाद के हुई थीं, जबकि पिछले पांच-छह वर्षों से लगातार पेपर लीक और भर्ती घोटालों के आरोप लग रहे हैं।
सोशल मीडिया पर हिमंता सरमा का समर्थन
दूसरी ओर, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर झारखंड के आंदोलनकारी छात्रों को अपना नैतिक समर्थन दिया। उन्होंने लिखा कि विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें JSSC-CGL अभ्यर्थियों की पीड़ा और उनकी चिंताओं को करीब से समझने का मौका मिला था।
सरमा के अनुसार, अगर झामुमो-कांग्रेस-राजद सरकार ने छात्रों की शिकायतों पर समय रहते संवेदनशीलता और पारदर्शिता दिखाई होती, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितता और पेपर लीक के बढ़ते आरोपों ने लाखों युवाओं का भविष्य संकट में डाल दिया है। उन्होंने राज्य सरकार से छात्रों की जायज मांगों को तुरंत स्वीकार करने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
इनपुट: IANS



