आरक्षण पर NDA में तकरार: मांझी और पासवान के बीच छिड़ी बहस, कांग्रेस ने उठाए सवाल
अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर ही दो प्रमुख घटक दलों में मतभेद गहरा गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के इस मुद्दे पर दिए…
अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण में क्रीमी लेयर और उप-कोटा को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर ही दो प्रमुख घटक दलों में मतभेद गहरा गया है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के इस मुद्दे पर दिए गए बयान के बाद, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उनसे इस्तीफे की मांग कर डाली है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस आपसी टकराव पर अब कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने जीतन राम मांझी पर निशाना साधते हुए कहा, "जीतन राम मांझी भारतीय जनता पार्टी को खुश करने में इतने आगे निकल गए हैं कि उन्हें अब देश, संविधान, पिछड़े वर्गों या दलितों की कोई परवाह नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि अगर मांझी को दलितों, संविधान या आरक्षण की फिक्र नहीं है, तो उन्हें तुरंत पद से हटा देना चाहिए।
चिराग पासवान और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस ने चिराग पासवान को भी आड़े हाथों लिया। सुरेंद्र राजपूत ने कहा, "जहां तक चिराग पासवान की बात है, अगर आप दलितों और संविधान के साथ खड़े हैं, तो भारतीय जनता पार्टी छोड़ दें। वरना, यह माना जाएगा कि आप सिर्फ दिखावा कर रहे हैं।"
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने दोनों मंत्रियों के बीच इस सार्वजनिक बहस को लेकर सामूहिक जिम्मेदारी के सिद्धांत की याद दिलाई। उन्होंने कहा, "चिराग पासवान और मांझी कौन हैं? दोनों मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और अपनी-अपनी पार्टियों के प्रमुख हैं।" उन्होंने आगे कहा कि जब तक किसी मंत्री के बयान का खंडन न हो, उसे सरकार का ही रुख माना जाता है और इस तरह का आरोप-प्रत्यारोप संविधान के खिलाफ है।
'सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है आरक्षण'
इस विवाद के बीच चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा, "संविधान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षण केवल अवसर का प्रावधान नहीं, बल्कि सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव, छुआछूत और असमानता के विरुद्ध सामाजिक न्याय का सुरक्षा कवच है।"
पासवान ने आगे लिखा, "ऐसे में एससी/एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ या उप-वर्गीकरण की मांग सामाजिक न्याय के मूल उद्देश्य को कमजोर करने वाली है। जो लोग इसका समर्थन करते हैं, उन्हें पहले स्वयं आरक्षण का लाभ छोड़कर एक नैतिक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।" उन्होंने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।
इनपुट: IANS



