NEET प्रदर्शन मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- आपराधिक तत्वों और ज्यादती करने वाले पुलिसकर्मियों को बख्शेंगे नहीं
NEET पेपर लीक के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी आपराधिक…
NEET पेपर लीक के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कथित ज्यादतियों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन में शामिल किसी भी आपराधिक तत्व या ज्यादती करने वाले पुलिस अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह बात कही।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) या किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने पर विचार कर रही है। पीठ ने टिप्पणी की, "हमारे मन में दो बातें हैं। एक तो जांच के लिए पुलिस अधिकारियों की एसआईटी बनाना या किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति बनाना।"
मामले वापस लेने की छूट और 'आपराधिक रिकॉर्ड' का अर्थ
अदालत ने दिल्ली और अन्य राज्यों को यह छूट दी है कि वे चाहें तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई FIR को बंद या वापस ले सकते हैं। इसके साथ ही, बेंच ने अपने 28 जुलाई के आदेश को भी स्पष्ट किया। उस आदेश में कहा गया था कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा जारी रह सकता है। अब कोर्ट ने साफ किया है कि यहां 'आपराधिक रिकॉर्ड' से मतलब गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोगों से है।
जब याचिकाकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया, तो बेंच ने कहा कि वह इसके उपयोग को लेकर एक व्यापक प्रोटोकॉल निर्धारित करेगी। पीठ ने कहा, "हम एक पूरा प्रोटोकॉल बनाना चाहते हैं कि इसका इस्तेमाल कैसे और कहाँ किया जा सकता है।" अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम आदेश देने से पहले विभिन्न राज्यों से जवाब का इंतजार करने का फैसला किया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 अगस्त की तारीख तय की है।
इनपुट: IANS



