शनिवार, 18 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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गुलाम अहमद मीर ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई, केंद्र पर साधा निशाना

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और AICC महासचिव गुलाम अहमद मीर ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के सा…

गुलाम अहमद मीर ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग दोहराई, केंद्र पर साधा निशाना
(फोटो: IANS)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और AICC महासचिव गुलाम अहमद मीर ने केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की अपनी मांग को एक बार फिर पुरजोर तरीके से उठाया है। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार इस बात की पक्षधर रही है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों से हुई नाइंसाफी को दूर कर उन्हें उनका राज्य वापस मिलना चाहिए।

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मीर ने 5 अगस्त 2019 के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय क्षेत्र के लोगों को विश्वास में नहीं लिया गया था। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2021 में बुलाई गई बैठक को याद दिलाया, जिसमें अधिकांश नेताओं ने चुनाव से पहले राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की थी। मीर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने तब पहले परिसीमन, फिर चुनाव और उसके बाद राज्य का दर्जा देने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश न होता, तो विधानसभा चुनाव भी समय पर नहीं होते।

राज्य का दर्जा: एकजुटता की अपील

गुलाम अहमद मीर ने कहा कि कांग्रेस शुरू से चाहती थी कि सरकार बनने के बाद सभी दल मिलकर केंद्र पर राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए दबाव डालें। उन्होंने बताया कि अब नेशनल कॉन्फ्रेंस ने सभी दलों को साथ आने का निमंत्रण दिया है और कांग्रेस इस पहल में शामिल होने पर जल्द ही अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेगी। मीर ने संकेत दिया, "राज्य के मुद्दे पर राजनीतिक दलों को अपने मतभेद भुलाकर एकजुट होना चाहिए।"

महिला आरक्षण और परिसीमन

महिला आरक्षण के मुद्दे पर मीर ने कहा कि यह कांग्रेस और सोनिया गांधी की पहल थी। उन्होंने सरकार द्वारा इसे जनगणना और परिसीमन से जोड़ने के प्रावधान की आलोचना की। गुलाम अहमद मीर के मुताबिक, "कांग्रेस ने तब भी सवाल उठाया था कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर आरक्षण तत्काल लागू किया जा सकता है।" उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर और असम में हुए परिसीमन के अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं और इससे प्रशासनिक संतुलन बिगड़ा है, इसलिए कांग्रेस इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है।

अन्य राजनीतिक मुद्दे

विभिन्न अन्य मुद्दों पर भी मीर ने अपनी राय रखी। वंदे मातरम विधेयक पर उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस कभी इसके खिलाफ नहीं रही, लेकिन इसे अनिवार्य बनाने का विरोध करती है। उन्होंने भाजपा पर विपक्ष को कमजोर करने और राजनीतिक खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया। पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर उन्होंने कहा कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र है और नेतृत्व ने सामूहिक व्यवस्था बनाई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के बयान पर टिप्पणी करते हुए मीर ने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति धार्मिक आधार पर देश को बांटने का प्रयास करती है, जबकि भारत की ताकत उसकी विविधता में है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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