वंदे मातरम पर विधेयक की चर्चा: सपा सांसद एसटी हसन बोले - 'देश के लिए जान देंगे, पर पूजा नहीं करेंगे'
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले वंदे मातरम से जुड़े एक संभावित विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। इस पर समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. एसटी हसन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि…
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले वंदे मातरम से जुड़े एक संभावित विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ हो गई है। इस पर समाजवादी पार्टी के सांसद डॉ. एसटी हसन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मुसलमान अपने देश के लिए जान दे सकते हैं, लेकिन उनसे ज़मीन की पूजा करने की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हसन ने कहा कि यह एक पुराना विवाद है जो अंग्रेज़ों के ज़माने से चला आ रहा है।
हसन ने स्पष्ट किया कि मुसलमानों ने कभी राष्ट्रगान गाने से मना नहीं किया, लेकिन वंदे मातरम में धरती की वंदना या पूजा का भाव है। उन्होंने अपनी धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए कहा, "हमारा मानना है कि अल्लाह ने इंसान को सर्वोच्च प्राणी बनाकर भेजा है... हम उन चीजों की पूजा या इबादत नहीं कर सकते।" उन्होंने सवाल उठाया कि जब सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले में ज़बरदस्ती न करने की बात कह चुका है तो फिर उन्हें इसे पढ़ने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है।
विवाद खड़ा करने का आरोप
सपा सांसद ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दे उठाकर अनावश्यक रूप से विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, "कल आप यह भी कह देंगे कि इस्लामिक पद्धति छोड़कर पूजा करना शुरू कर दें। ऐसे आप देश को कहां लेकर जाएंगे? क्या यह सब मुमकिन है?"
अन्य मुद्दों पर भी दी राय
एसटी हसन ने 'कॉकरोच पार्टी आंदोलन' और सोनम वांगचुक के अनशन का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन देश के युवाओं के भविष्य के लिए अच्छा है और देश के सभी हितैषी उनके साथ हैं। परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि लोग आत्महत्या कर रहे हैं और ज़िम्मेदार लोगों को अपने पद पर बने रहने का कोई हक़ नहीं है। इसके अलावा, कांवड़ यात्रा पर उन्होंने कहा कि यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि यात्रा सुचारु रूप से चले, ताकि कांवड़ यात्रियों और आम लोगों, दोनों को कोई परेशानी न हो।
इनपुट: IANS



