बाल यौन शोषण के दोषी की वापसी पर ब्रिटेन और पाकिस्तान में तनाव, इस्लामाबाद ने रखी शर्तें
ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक दोषी यौन अपराधी की वापसी को लेकर कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के सरगना शबीर अहमद को वापस लेने से इनकार कर दिया है, जिसे बच्चों से…
ब्रिटेन और पाकिस्तान के बीच एक दोषी यौन अपराधी की वापसी को लेकर कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान ने रोचडेल ग्रूमिंग गैंग के सरगना शबीर अहमद को वापस लेने से इनकार कर दिया है, जिसे बच्चों से बलात्कार के 30 मामलों में दोषी ठहराया गया था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान इस मामले में अपने दो राजनीतिक विरोधियों के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।
शबीर अहमद को 2012 में 22 साल की सज़ा सुनाई गई थी और उसने जेल में 14 साल बिताए हैं। उसे जुलाई की शुरुआत में रिहा किया गया। ब्रिटेन ने 2016 में ही उसका पासपोर्ट रद्द कर दिया था ताकि रिहाई के बाद उसे देश से निकाला जा सके। पीड़ितों को भी यह आश्वासन दिया गया था कि उसे ब्रिटेन से निर्वासित कर दिया जाएगा।
ब्रिटेन की चेतावनी और कानूनी अड़चन
ब्रिटिश सरकार ने इस मामले पर कड़ा रुख़ अपनाया है। विदेश मंत्री यवेट कूपर ने चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तान शबीर अहमद को वापस लेने से मना करता है, तो सरकार उसके खिलाफ 'सभी संभव तरीकों' का इस्तेमाल करने पर विचार करेगी। उन्होंने हाउस ऑफ कॉमन्स की विदेश मामलों की समिति को बताया कि ब्रिटेन पहले भी प्रतिबंधों की चेतावनी देकर अन्य देशों को अपने अपराधियों को वापस लेने के लिए राज़ी कर चुका है।
हालांकि, अहमद को पाकिस्तान भेजने में 1971 के इमिग्रेशन एक्ट का 55 साल पुराना एक नियम आड़े आ रहा है। यह नियम उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करता है जो 1973 से पहले ब्रिटेन आए थे और वहां कम से कम पांच साल रहे।
पाकिस्तान का आधिकारिक पक्ष
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने गुरुवार को सार्वजनिक रूप से पुष्टि की कि पाकिस्तान सरकार शबीर अहमद को वापस नहीं लेगी। रिपोर्टों के मुताबिक, इस्लामाबाद अहमद की वापसी के बदले में ब्रिटेन से अपने दो राजनीतिक विरोधियों को सौंपने की शर्त रख रहा है। यह स्थिति तब है जब 'टेलीग्राफ' की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को अगले तीन वर्षों में ब्रिटेन से 155 मिलियन पाउंड की विदेशी सहायता मिलनी है।
अपराध की भयावहता
ब्रिटेन में संगठित बाल यौन शोषण पर एक निजी वित्त पोषित संसदीय जांच रिपोर्ट में भयावह तथ्य सामने आए थे। 219 पन्नों की इस रिपोर्ट के अनुसार, कई दशकों में कम से कम 2.5 लाख लड़कियां और संभवतः उससे भी अधिक बच्चे गैंग रेप, मानव तस्करी, और यातना का शिकार हुए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इन अपराधों के आरोपियों में एक बड़ी संख्या पाकिस्तानी मुस्लिम पृष्ठभूमि के लोगों की थी।
इनपुट: IANS



