जामिया में छात्र संघ की बहाली पर गतिरोध: प्रशासन का बाहरी हस्तक्षेप का आरोप, पढ़ाई ऑनलाइन
जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब प्रशासन और बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों के बीच उलझ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कांग्रेस…
जामिया मिलिया इस्लामिया (JMI) में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब प्रशासन और बाहरी राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों के बीच उलझ गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं पर अनधिकृत रूप से परिसर में घुसने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई है, वहीं शिक्षकों ने शिक्षण प्रक्रिया में बाधा की निंदा की है। इस पूरे घटनाक्रम के चलते विश्वविद्यालय को दिवाली की छुट्टियों तक पढ़ाई ऑनलाइन मोड में करनी पड़ रही है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, जामिया के कई शिक्षकों ने आरोप लगाया है कि कुछ राजनीतिक तत्व छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन ने विशेष रूप से कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी और इमरान मसूद पर परिसर में अनधिकृत रूप से प्रवेश करने का आरोप लगाया है। शिकायत के अनुसार, प्रतापगढ़ी ने 21 अक्टूबर को गेट का ताला तोड़ा, जबकि मसूद 23 अक्टूबर को दीवार फांदकर अंदर आए थे। प्रशासन ने यह भी बताया कि सपा सांसद मोहिबुल्लाह नदवी को भी परिसर में आते समय हिरासत में लिया गया था।
छात्रों की मांग और विश्वविद्यालय का पक्ष
छात्रों का विरोध-प्रदर्शन छात्र संघ के गठन और चुनाव कराने की मुख्य मांग पर केंद्रित है। इस संबंध में उन्होंने 26 अक्टूबर को कुलपति को एक औपचारिक पत्र भी सौंपा है। छात्रों ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक उनकी भूख हड़ताल और शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहेगा।
दूसरी ओर, जामिया प्रशासन का कहना है कि उन्होंने छात्र संघ को बहाल करने की दिशा में पिछले 20 वर्षों में सबसे ठोस कदम उठाए हैं। प्रशासन ने याद दिलाया कि 2006 में हिंसक झड़पों के बाद छात्र संघ को भंग कर दिया गया था। इसी प्रक्रिया के तहत 21 अक्टूबर को एक 'संविधान मसौदा समिति' का गठन किया गया है, जिसे अदालती आदेशों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अध्ययन करने के लिए समय दिया जाना चाहिए।
पढ़ाई पर असर और बाहरी तत्वों का कब्ज़ा
विरोध-प्रदर्शन के कारण विश्वविद्यालय का अकादमिक माहौल भी प्रभावित हुआ है। प्रशासन के अनुसार, 24 अक्टूबर से 'विश्वविद्यालय के बाहर के लोगों' ने राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र विभागों की इमारत पर कब्जा कर ताला लगा दिया है। इसी स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय को 24 अक्टूबर से दिवाली की छुट्टियों तक सभी कक्षाओं को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करना पड़ा। आगे का निर्णय स्थिति की समीक्षा के बाद लिया जाएगा। प्रशासन ने बाहरी लोगों से परिसर का माहौल खराब न करने की अपील की है।
इनपुट: IANS



