त्योहारी सीजन में कांग्रेस की रैली: दिल्ली के व्यापारियों ने 1 नवंबर के आयोजन को टालने की अपील की
दिल्ली के व्यापारी संगठनों और मिठाई दुकानदारों ने कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों से 1 नवंबर को प्रस्तावित अपनी रैली दीपावली के बाद आयोजित करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि त्योहारी सीजन के…
दिल्ली के व्यापारी संगठनों और मिठाई दुकानदारों ने कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दलों से 1 नवंबर को प्रस्तावित अपनी रैली दीपावली के बाद आयोजित करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि त्योहारी सीजन के चरम पर इस आयोजन से उनके कारोबार पर गंभीर असर पड़ेगा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापारियों ने चिंता जताई है कि बार-बार होने वाले ऐसे प्रदर्शनों से व्यावसायिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
व्यापारियों का कहना है कि पिछले चार महीनों में यह इस तरह की पांचवीं रैली होगी। इन प्रदर्शनों के कारण अक्सर दुकानें बंद रखनी पड़ती हैं, तोड़फोड़ का डर बना रहता है और ग्राहकों की आवाजाही लगभग ठप हो जाती है।
व्यापारियों ने बताई अपनी पीड़ा
बंगाली मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मुकेश गुप्ता ने कहा, “पिछले चार महीनों में यह पांचवीं रैली है। इसने दुकानदारों और व्यापारियों के कारोबार को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है। कारोबारी अपने परिवार, पत्नी और बच्चों का खर्च उठाने में भी असमर्थ हो गए हैं।” उन्होंने राजनीतिक दलों से अपील की कि वे रैलियों के बजाय बातचीत के जरिए अपने मतभेद सुलझाएं। गुप्ता ने कहा कि उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी से कई बार रैली की तारीख पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
वहीं, 'बंगाली स्वीट हाउस एंड पेस्ट्री शॉप' के मालिक वर्जेश अग्रवाल ने भी त्योहार के समय रैली के प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “दीपावली एक प्रमुख त्योहार है... इस एक दिन की रैली के कई दूरगामी असर भी होंगे। मुझे लगता है कि दो-तीन दिनों तक व्यापारिक गतिविधियां काफी धीमी रहेंगी।”
"लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान, पर समय गलत"
वर्जेश अग्रवाल ने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उन्होंने रैली के समय को व्यापारियों और आम जनता के लिए मुश्किल भरा बताया। उन्होंने सुझाव दिया, “अगर वे रैली को दीपावली के बाद के लिए पुनर्निर्धारित कर सकें, तो बेहतर होगा। इससे उनका लोकतांत्रिक अधिकार भी सुरक्षित रहेगा, जनता को भी कोई परेशानी नहीं होगी और व्यापार भी बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।”
खान मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव मेहरा ने कहा कि व्यापारियों की बार-बार की अपीलों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, “क्या सिर्फ हम व्यापारियों को ही हमेशा नुकसान उठाना पड़ेगा? हर बार मार हमें ही झेलनी पड़ती है।” मेहरा ने आरोप लगाया कि अगर त्योहारी सीजन में व्यापारी कमाई नहीं कर पाएंगे तो उनके कर्मचारी और परिवार प्रभावित होंगे, जिससे बेरोजगारी बढ़ने का दावा करने का मकसद पूरा हो सकता है।
इनपुट: IANS



