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इंटरनेट का उपयोग हॉस्पिटल में किस तरह से किया जाता है?

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इंटरनेट का उपयोग हॉस्पिटल में किस तरह से किया जाता है?

इंटरनेट का उपयोग हॉस्पिटल में किस तरह से किया जाता है इसको लेकर हम आपको बताते हैं की अस्पताल में मैनुअल सिस्टम से काम होने के बजाए सभी काम ऑनलाइन होंगे। ओपीडी में पर्ची कटाने से लेकर दवाई की बिलिंग व मरीजों को डिस्चार्ज करने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होगी। रजिस्टर की जरूरत भी नहीं होगी। सभी रिकार्ड कम्प्यूटर में ऑनलाइन लोड होंगे। 100 बिस्तर जिला अस्पताल को अपग्रेड कर ई- हॉस्पिटल का रूप दिया गया है, जहां मरीजों से लेकर अस्पताल के डाॅक्टर व कर्मचारियों का रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा।

हर मरीज का होगा अलग कोड
जब पंजीकरण होगा, उसे एक कोड दिया जाएगा। हर मरीज का कोड अलग होगा। इसी कोड से वह जांच रिपोर्ट ऑनलाइन निकाल सकता है। मरीज का रिकॉर्ड महीनों तक सुरक्षित रखा जाएगा। इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी, ऑपरेशन थियेटर, दवा स्टोर, ब्लड बैंक और पैथालॉजी में कम्प्यूटर लगाए जाएंगे। ये सभी आपस में कनेक्ट किए जाएंगे। सभी विभाग भी इंटरनेट के जरिए आपस में कनेक्ट हो जाएंगे।

दवाई ना होने का बहाना नहीं चलेगा
ऑनलाइन के बाद अस्पताल के कर्मचारी मरीजों से संबंधित जानकारी या रिकार्ड नहीं होने का बहाना नहीं बना सकेंगे। कई बार उन्हें मार्केट से दवाइयां लाने पर मजबूर करते हैं। इसके पीछे दवाई दुकानों के साथ उनका बेहतर संबंध होता है। जिसके कारण कर्मचारी दवाइयां होने के बाद भी इनकार कर देते हैं।

जन्म-मृत्यु का रिकाॅर्ड भी
जिला अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों की जानकारी ऑनलाइन होगी। जन्म मृत्यु रिकार्ड को भी ऑनलाइन किया जाएगा। जिसके जरिए लोगों को उनके सगे संबंधियों के जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्र बने हैं या नहीं इसकी जानकारी मिल सकेगी। अभी मैनुअल सिस्टम से जानकारी मिल रही है। इसमें भी विभागीय प्रक्रियाओं के चलते देरी होने से लोगों को बार-बार अस्पताल का चक्कर लगाना पड़ता है।

ऐसे काम करेगा सिस्टम
दवाइयां, स्नेक बाइट, रैबीज के इंजेक्शन है या नहीं, इसकी जानकारी मोबाइल या कम्प्यूटर में वेबसाइट में क्लिक करते ही मिलेगी। यदि मरीज घर में बैठे है तो वे अस्पताल में उपयोग की दवाई है या नहीं, यह जान सकेंगे। अस्पताल में नहीं है तो वे इमरजेंसी में वे मार्केट से संबंधित दवाइयां खरीद कर ला सकते हैं।

मरीजों को ये होंगे फायदे
एक ही स्थान पर मरीजों की जांच व भुगतान की सुविधा मिलेगी।

ओपीडी व अस्पताल के वार्ड में जाने के लिए लाइन लगाने की जरूरत नहीं।

मोबाइल में पंजीयन नंबर सुरक्षित रखकर मरीज कोई भी पंजीकृत अस्पताल में इलाज करा पाएंगे।

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मेनुअल से ऑनलाइन सिस्टम से कम कर्मचारियों में भी बेहतर काम हो सकेगा। अभी कई कर्मचारियों के माध्यम से रजिस्टर में काम हो रहा है।

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