शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
समाज

भरवाड़ समाज का इतिहास

भरवाड़ गुजरात की एक हिंदू जाति है जो मुख्यतः पशुपालन और कृषि व्यवसाय से जुड़ी है। इस समाज के लोग स्वयं को प्राचीन नंद वंश से संबंधित मानते हैं और 961 ईं. में सिंध के मुस्लिम आक्रमण से बचने के लिए सौराष्ट्र क्षेत्र में बस गए थे।

भरवाड़ समाज का इतिहास

भरवाड़ भारत के गुजरात राज्य में पाई जाने वाली एक हिंदू जाति है. जो मुख्य रूप से पशुपालन व्यवसाय का काम करती है. भरवाड़ जाति के लोग खुद को पुराने नंदवंश से संबंधित मानते हैं. ऐसा माना जाता है कि नंद वंश की शुरूआत कृष्ण भगवान को पालने वाले उसके पालक पिता द्वारा हुई.

विज्ञापन
images
भरवाड़ समाज

ऐसा माना जाता है कि नंद मथुरा जिले के गोकुल से आए थे तथा द्वारका के रास्ते सौराष्ट्र से गुजरे. सिंध पर होने वाले मुस्लिम आक्रमण से दूरी बनाने की इच्छा से. 961 ईं. में वे उत्तरी शहर भानसकंठा तथा उसके बाद सौराष्ट्र तथा अन्य क्षेत्रों में फैल गए. इस समाज के लोग मुख्य रूप से भेड़-बकरियों के पालन से जुड़े हुए थे.

images 1
बाबा नंद

इस समाज के लोग प्राथमिक रूप से इतने शिक्षित नहीं हैं तथा इनकी साक्षरता दर बहुत कम रही है. इनमें से काफी गिर राष्ट्रिय उद्यान के आस पास रहते हैं. जिससे वो एशियाई शेरों के हमलों से अपने पशुधन का बचा पाएं. पशुपालन के साथ साथ इस सामाज के लोग कृषि कार्यों में भी लगें हुए हैं. लेकिन बहुत कम लोगों के पास खुद की जमीन हैं.

यह भी पढ़ें: सिक्किम में संगीत का इतिहास

इस समाज में विभाजन की बात करें, तो मोताभाई और नानाभाई के बीच विभाजन के अनेंक कारण दिए जाते हैं, जिसमें सबसे एक है कि ऐसा माना जाता है कि दो चरवाहे भाईयों को कृष्ण ने आदेश दिया की अपनी भेड़-बकरियों को लेकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाओं. एक भाई ने एक भरवाड़ महिला से शादी कर ली तथा दूसरे भाई ने कोली से शादी कर ली. दूसरे भाई ने अपने समुदाय से बाहर शादी की थी, इस कारण रिति रिवाज में उसको दुषित माना गया.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है.

KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →