‘कुंभ मेला वायरल स्टार’ को केरल हाईकोर्ट से मिली बड़ी राहत, कोच्चि से बाहर ले जाने पर रोक
‘कुंभ मेला वायरल स्टार’ के नाम से चर्चित हुई महिला मोनालिसा को केरल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को एक अहम अंतरिम आदेश में अदालत ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि महिला…
‘कुंभ मेला वायरल स्टार’ के नाम से चर्चित हुई महिला मोनालिसा को केरल हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मंगलवार को एक अहम अंतरिम आदेश में अदालत ने राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध या अदालत की अनुमति के बिना कोच्चि शहर की सीमा से बाहर न ले जाया जाए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने महिला द्वारा पुलिस सुरक्षा की मांग को लेकर दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की इजाज़त के बिना केरल पुलिस इस महिला को मध्य प्रदेश पुलिस को नहीं सौंप सकती। यह निर्देश तब आया जब अदालत को बताया गया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने केरल के डीजीपी को महिला को मध्य प्रदेश पुलिस को सौंपने के लिए कहा था, लेकिन साथ ही यह भी कहा था कि ऐसा करने से पहले हाईकोर्ट से उचित आदेश ले लिया जाए।
मामला और आयोग का दखल
यह पूरा मामला एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद शुरू हुआ था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जब महिला की शादी मोहम्मद फरमान से हुई, तब वह नाबालिग थी। इसी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने दखल दिया था। याचिकाकर्ता ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताई है।
महिला के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि अगर उसे मध्य प्रदेश वापस भेजा गया तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। वकील ने यह भी दावा किया कि शादी के समय महिला की उम्र 18 साल और तीन महीने थी और उसका मूल जन्म प्रमाण पत्र बाद में उसकी जानकारी के बिना ही रद्द कर दिया गया था, जिसे मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी जा चुकी है।
सुरक्षा पर अदालत का स्पष्ट रुख
याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि महिला फिलहाल उसकी सुरक्षा में है, इसलिए उसे कोर्ट की अनुमति के बिना किसी को नहीं सौंपा जा सकता। हाईकोर्ट ने महिला को दी गई पुलिस सुरक्षा जारी रखने का भी आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया कि अगर महिला छिपकर रहेगी तो पुलिस के लिए सुरक्षा देना मुश्किल होगा।
जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने मौखिक रूप से कहा कि पुलिस सुरक्षा तभी दे सकती है जब उसे पता हो कि महिला कहां है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब भी महिला को कोई खतरा महसूस हो, वह अपने मामले के लिए नियुक्त महिला सुरक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकती है, जो तत्काल उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी। इस मामले की अगली सुनवाई अगले हफ्ते होगी।
इनपुट: IANS



