मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री: भारत कैसे बनेगा 250 अरब डॉलर का ग्लोबल पावरहाउस?
आने वाले दशकों में भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। शुक्रवार को जारी FICCI-DUA की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, साल 2047 तक इस सेक्टर का बाजार 250…
आने वाले दशकों में भारत का मेडिकल डिवाइस उद्योग एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। शुक्रवार को जारी FICCI-DUA की एक संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, साल 2047 तक इस सेक्टर का बाजार 250 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट में मेडिकल उपकरणों के रखरखाव के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और टिकाऊ इकोसिस्टम बनाने का विस्तृत रोडमैप भी पेश किया गया है।
वर्तमान में भारतीय मेडिकल डिवाइस सेक्टर का बाजार लगभग 14 अरब डॉलर का है। फार्मास्यूटिकल्स विभाग और फिक्की द्वारा आयोजित 'इंडिया मेडिकल डिवाइस 2026' कार्यक्रम में जारी इस व्हाइट पेपर में अनुमान लगाया गया है कि यह उद्योग इसी दशक में 30 से 50 अरब डॉलर के स्तर को छू सकता है।
विकास के पीछे की वजहें
रिपोर्ट के मुताबिक, इस तेज रफ्तार विकास के पीछे कई अहम कारण हैं। इनमें स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग, एडवांस मेडिकल टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को सरकारी समर्थन और भारत का ग्लोबल मेडटेक हब बनने का लक्ष्य शामिल है। प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम जैसी पहलों ने घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग ही काफी नहीं
हालांकि, रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि सेक्टर का सतत विकास सिर्फ नए उपकरण बनाने पर ही निर्भर नहीं है। इसके लिए मेडिकल उपकरणों की सर्विसिंग, रखरखाव, कैलिब्रेशन और उनके पूरे जीवन-चक्र के प्रबंधन के लिए एक विश्व स्तरीय इकोसिस्टम बनाना भी उतना ही जरूरी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आज मेडिकल उपकरण आधुनिक स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ हैं, जो बीमारियों का समय पर पता लगाने से लेकर सर्जरी और एडवांस इलाज तक में मदद करते हैं।
बेहतर रखरखाव के फायदे
व्हाइट पेपर के अनुसार, उपकरणों का सही रखरखाव सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा को बेहतर बनाता है और इलाज की प्रभावशीलता को बढ़ाता है। इससे न केवल उपकरणों का डाउनटाइम (खराब रहने का समय) कम होता है, बल्कि उनकी उम्र भी बढ़ती है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में किए गए निवेश का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित होता है।
सुधार के लिए सिफारिशें
इन चुनौतियों से निपटने के लिए, रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। इसमें सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के डिवाइस क्लासिफिकेशन सिस्टम पर आधारित एक जोखिम-स्तरीय हाइब्रिड रखरखाव फ्रेमवर्क का प्रस्ताव है। साथ ही, सर्विस इंजीनियरों के लिए एक राष्ट्रीय सर्टिफिकेशन आर्किटेक्चर बनाने, तकनीकी ट्रेनिंग को मजबूत करने और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और डिजिटल मॉनिटरिंग को व्यापक रूप से अपनाने की भी वकालत की गई है।
इनपुट: IANS



